उच्चतम न्यायालय दो राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग उपचुनाव कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली गुजरात कांग्रेस की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने के लिए राजी हो गई है। यह याचिका गुजरात कांग्रेस नेता परेशभाई धनानी ने दायर की है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और स्मृति ईरानी के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद यह सीटें खाली हुई हैं।
वर्तमान में शाह और ईरानी 17वीं लोकसभा का हिस्सा हैं। शाह गुजरात के गांधीनगर से सांसद चुने गए हैं वहीं ईरानी को उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से जीत मिली है। मोदी कैबिनेट में शाह को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। जबकि ईरानी महिला एवं बाल कल्याण और कपड़ा मंत्रालय का पदभार संभाल रही हैं। दोनों ने सोमवार को संसद भवन में लोकसभा सांसद के तौर पर शपथ ली।
न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अवकाश पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। पीठ ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि इसपर बुधवार को सुनवाई की जाएगी। अमरेली से कांग्रेस विधायक और गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धनानी ने न्यायालय में याचिका दायर कर दोनों उपचुनाव साथ कराने का निर्देश चुनाव आयोग को देने का अनुरोध किया है।
चुनाव आयोग की ओर से 15 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दोनों सीटों के लिए चुनाव पांच जुलाई को ही होने हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा सहित दोनों सदनों की सभी रिक्तियों पर उपचुनाव के लिए उन्हें ‘अलग-अलग रिक्तियां’ माना जाएगा और अलग-अलग अधिसूचना जारी की जाएगी तथा चुनाव भी अलग-अलग होंगे। हालांकि इनका कार्यक्रम समान हो सकता है।
लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार में अमित शाह गृह मंत्रालय और स्मृति ईरानी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का प्रभारी बनाया गया है। धनानी ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग के आदेश को असंवैधानिक, मनमाना और गैरकानूनी घोषित करते हुए इसे रद्द करने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि आयोग के इस आदेश से संविधान के अनुच्छेद 14 का हनन होता है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग को उपचुनाव एकसाथ कराने और गुजरात सहित सभी राज्यों में सारी रिक्त सीटों के लिए साथ में चुनाव कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। इस विधायक ने अपनी याचिका में कहा है कि गुजरात में राज्य सभा की दो सीटों के लिए अलग अलग चुनाव जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत प्रदत्त आनुपातिक प्रतिनिधित्व की योजना का संतुलन बिगाड़ेगा।
याचिका में कहा गया है कि संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत यह बुनियादी सिद्धांत है कि यदि चुनाव के समय नियमित रिक्तियां हैं तो इसे एकसाथ कराया जाना चाहिए ताकि इन चुनावों में एकल हस्तांतरित मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था लागू की जा सके।
गुजरात की 182 सदस्यीय विधान सभा में भाजपा के 100 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के 75 सदस्य हैं जबकि सात स्थान रिक्त हैं। कांग्रेस का आरोप है कि केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा निर्वाचन आयोग कार्यालय का अपने राजनीतिक प्रचार के लिये इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पूरी तरह से दुराग्रहपूर्ण और मनमानी है।
कांग्रेस ने गुजरात की दोनों रिक्त सीटों के लिये एक साथ चुनाव कराने की मांग की है क्योंकि अलग अलग चुनाव होने पर सत्तारूढ़ दल होने के कारण भाजपा को दोनों स्थानों पर जीत हासिल करने की स्थिति में होगी।
निर्वाचन आयोग ने 15 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय के 1994 और 2009 के दो फैसलों का हवाला दिया है जिसमें जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत एक ही राज्य में अलग अलग उपचुनाव कराने की व्यवस्था का समर्थन किया था।