उच्चतम न्यायालय ने मस्जिद के अंदर मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश वाली जनहित याचिका पर सुनवाई को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। याचिका में महिलाओं को मस्जिद के अंदर प्रवेश न करने देने को अवैध और असंवैधानिक घोषित किए जाने के लिए दिशा-निर्देश देने के लिए कहा गया है।
16 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय मुस्लिम महिलाओं को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में प्रवेश करने की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया और उसने केंद्र को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग, सेंट्रल वक्फ काउंसिल और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को नोटिस जारी किया था।
न्यायमूर्ति एसए बोबड़े और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने पुणे के एक दंपती की याचिका पर केंद्र को जवाब देने का निर्देश दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि सबरीमला मंदिर मामले में हमारे फैसले की वजह से ही हम इस मामले पर सुनवाई करेंगे।
बता दें कि एक मुस्लिम दंपती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत देने की अनुमति मांगी है। वकील आशतोष दुबे की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं पर मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने पर रोक गैरकानूनी और असंवैधानिक है।
यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया कि कुरान और हदीस में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। इस तरह की परंपरा महिलाओं की गरिमा के भी खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि पुरुषों की तरह महिलाओं का भी इबादत करने का संवैधानिक अधिकार है।