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झगड़े के दौरान, 'मैं तुझे देख लूंगा' कहना धमकी नहीं- गुजरात हाईकोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 23 Feb 2019 11:52 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

गुजरात हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करते हुए फैसला सुनाया कि झगड़े के दौरान ये कहना कि 'मैं तुझे देख लूंगा' धमकी नहीं है। कोर्ट ने इस वाक्य को आपराधिक धमकी कहने से इनकार करते हुए कहा कि धमकी वह होती है, जिससे दिमाग में कोई डर पैदा हो। ये फैसला कोर्ट ने गुरुवार को सुनाया। 



ये मामला साबरकांठा के वकील मोहम्मद मोहलिन छालोतिया से जुड़ा है। वह मई 2017 में लॉकअप में बंद अपने मुवक्किल से मिलने गए थे। पुलिस ने उन्हें उससे मिलने से रोक लिया। जिसके बाद उनकी पुलिस से बहस हो गई। वकील ने गुस्से में पुलिसकर्मियों से कहा कि वह उसे देख लेंगे और हाईकोर्ट में घसीटने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने वकील के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और अफसर को ड्यूटी से रोकने का मामला दर्ज कर लिया।


तभी से वकील जेल में बंद है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एएस सुपैया ने कहा कि इस केस में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जिसे आपराधिक धमकी समझा जाए। फिर हाईकोर्ट ने धमकी की व्याख्या स्पष्ट की और कहा कि किसी को धमकी दी जाए, तो पीड़ित को स्पष्ट होना चाहिए कि आरोपी किसी तरह के गैरकानूनी काम से उसे शारीरिक, मानसिक अथवा उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। 

क्या कहा वकील ने?

वकील ने कहा कि अपने मुवक्किल को कानूनी सलाह देना गैरकानूनी नहीं है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि वे वकील हैं। पुुलिस ने 10 बजे उनके मुवक्किल को गिरफ्तार कर लिया था। उनके खिलाफ दोपहर 3.35 तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। 



उन्होंने दलील में आगे कहा कि मैं उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए थाने गया था। मुवक्किल को कानूनी सलाह देने से रोकने का कोई कानून नहीं है। ऐसा करने वाले को ही लॉकअप में बंद करना उसके मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन के समान है।


कोर् ने कहा कि इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं है कि वकील ने पुलिस को उसका कोई काम करने से रोका हो। वकील के खिलाफ आईपीसी की धारा 186, 189 और 506 (1) के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। 

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