पश्चिमी पशिया में बढ़ते तनाव के बीच पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट ने दुनिया के देशों को कई कड़े और अभूतपूर्व फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकारें अब हर बूंद ईंधन बचाने की जंग लड़ रही हैं। कहीं छुट्टियां घोषित हो रही हैं, तो कहीं गाड़ियां सड़कों से गायब की जा रही हैं। दुनिया भर में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए देशों ने अलग-अलग लेकिन सख्त रणनीतियां अपनाई हैं, जिनका मकसद साफ है, ईंधन बचाना, जरूरी सेवाएं चलाना और अर्थव्यवस्था को थामे रखना।
एशिया: छुट्टी, राशनिंग और ‘वर्क फ्रॉम होम’ का सहारा एशियाई देशों ने सबसे तेजी से कदम उठाए हैं। श्रीलंका ने स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी घोषित कर दी, साथ ही क्यूआर कोड आधारित फ्यूल राशनिंग लागू कर दी। बांग्लादेश ने शिक्षा संस्थान बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी और रोजाना 5 घंटे की बिजली कटौती लागू की। भूटान ने जमाखोरी रोकने के लिए जरीकैन में ईंधन बिक्री पर प्रतिबंध लगाया। पाकिस्तान में चार दिन का वर्क वीक लागू।
अफ्रीका: बाजार जल्दी बंद, बिजली पर कंट्रोल अफ्रीकी देशों में ऊर्जा बचाने के लिए सीधे जीवनशैली पर असर डालने वाले फैसले लिए गए। मिस्र में बाजार और रेस्टोरेंट रात 9 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया। केन्या में ईंधन राशनिंग और निर्यात पर रोक, क्योंकि भंडार तेजी से घट रहा है।
ओशिआनिया: ‘नो कार डे’ की वापसी
न्यूज़ीलैंड 1979 के कार-लेस डे जैसे नियम को फिर लागू करने पर विचार कर रहा है। ईंधन भंडार की निगरानी के लिए “एंबर अलर्ट” प्रोटोकॉल लागू किया। जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण एयर न्यूजीलैंड की लगभग 1,100 उड़ानें रद्द हुईं जिससे 44,000 यात्री प्रभावित हुए।
यूरोप: तय सीमा में मिलेगा ईंधन...यूरोपीय देशों ने सीधे खपत पर लगाम लगाई है। स्लोवाकिया ने डीजल खरीद पर सरकारी कोटा लागू, ताकि जमाखोरी और कमी रोकी जा सके। वहीं स्लोवेनिया में देश की दूसरी सबसे बड़ी ईंधन कंपनी एमओएल स्लोवेनिया ने अपने स्टेशनों पर राशनिंग लागू की। कारों के लिए 30 लीटर और ट्रकों के लिए 200 लीटर की सीमा।
तेल सिर्फ ईंधन नहीं, रणनीतिक हथियार बना, हर बूंद पर पहरा...
ऊर्जा संकट ने दुनिया को एक नई हकीकत दिखा दी है। अब तेल सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार बन चुका है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, दुनिया का एक ही मंत्र है ‘बचत ही बचाव’ है।