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पश्चिम एशिया संकट: यमन की राजधानी के पास तेल ठिकानों पर सऊदी का हमला, हूती विद्रोहियों ने दी कार्रवाई की धमकी

Tue, 13 Oct 2026 10:22 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सना

सार

यमन की राजधानी सना के पश्चिम में तेल ठिकानों पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों की खबर है। इससे पहले लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी गई थी। हूतियों ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। रियाद में पहले भी हमले में लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर आई थी। क्या संघर्ष और बढ़ेगा? क्या बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से तेल और व्यापार की आवाजाही प्रभावित होगी?

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पश्चिम एशिया में फिर गहराया संकट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच यमन की राजधानी सना के पश्चिम में तेल ठिकानों पर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हवाई हमले किए हैं। हूती विद्रोही से जुड़े प्रसारक अल-मसीरा और स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इन हमलों से पहले गठबंधन ने इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी थी। सना में लोगों ने धमाकों की आवाजें सुनने की जानकारी दी। हालांकि, शुरुआती जानकारी में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस घटनाक्रम से सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष और बढ़ने की आशंका है।

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सऊदी गठबंधन ने तेल ठिकानों के पास रहने वाले लोगों को क्यों चेताया?
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक दुर्लभ सार्वजनिक बयान जारी कर हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली राजधानी सना के पश्चिम में स्थित यमनी ऑयल कंपनी के परिसर और आसपास के भंडारण क्षेत्रों को खाली करने की अपील की थी। इसके कुछ समय बाद ही हवाई हमलों की खबर आई। जिस इलाके को खाली करने के लिए कहा गया, उसका नाम अल-सुबाहा है। यह पहाड़ी पर स्थित है, जहां से राजधानी का इलाका दिखाई देता है। यह घनी आबादी वाला क्षेत्र नहीं है, लेकिन पास में मौजूद ईंधन स्टेशन का इस्तेमाल आम लोग करते हैं। यमनी ऑयल कंपनी ने कहा था कि उसके भंडारण केंद्र खाली हैं। कंपनी के मुताबिक, सऊदी हमले से तेल के भंडार या स्थानीय लोगों को होने वाली आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, हमले में किन ठिकानों को नुकसान पहुंचा, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हुई।

हूती विद्रोहियों ने हमले के जवाब में क्या धमकी दी?
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने कहा कि सना पर सऊदी अरब के किसी भी हमले का जवाब रियाद में दिया जाएगा। उन्होंने जवाबी कार्रवाई को दृढ़ और दर्दनाक बताया। इससे पहले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर भी चेतावनी दी थी। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक, उनके विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता सभी के लिए होनी चाहिए। हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। ऐसे में संघर्ष का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ रहा है।
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सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष क्यों बढ़ा?
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मौजूदा संघर्ष पिछले महीने उस समय तेज हुआ, जब हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास कई अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया। यह समुद्री रास्ता लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित है और खाड़ी क्षेत्र से तेल तथा अन्य सामान की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में काम कर रहा है और इन इलाकों पर फिर से नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है। शनिवार को रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर दी गई थी। सऊदी गठबंधन ने मंगलवार को रियाद के उत्तर में तीन ड्रोन रोकने का भी दावा किया, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।

क्या दूसरे देश भी संघर्ष रोकने की कोशिश कर रहे हैं?
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत के दौरान हूती विद्रोहियों से सऊदी अरब पर हमले तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन हमलों का कोई औचित्य नहीं है और इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। मिस्र ने ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का कूटनीतिक समाधान निकालने पर भी जोर दिया, ताकि क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता न बढ़े। दूसरी ओर, सऊदी अरब हूती विद्रोहियोंके खिलाफ अभियान में अमेरिका से अधिक प्रत्यक्ष सैन्य मदद चाहता है। अमेरिका अब तक खुफिया जानकारी साझा करने, निशाने की पहचान करने और अभियान की योजना बनाने में सहायता देता रहा है, लेकिन उसने हूती विद्रोहियों पर सीधे हमले करने से परहेज किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को हूती विद्रोहियों के व्यवहार को बेहद खराब बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेगा या नहीं। यदि अमेरिका सीधे संघर्ष में उतरता है, तो हूती विद्रोहियों की ओर से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की आशंका है। इससे खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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