दिल्ली के मोती बाग के पास सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केस को दिल्ली हाईकोर्ट से अपने पास स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में अब कार्रवाई शुरू हो चुकी है और वह मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करना चाहती।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट मामले की निगरानी जारी रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मामले की नियमित अंतराल पर निगरानी करने को कहा है। अदालत ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को भी मौजूदा कार्यवाही के संबंध में अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम को कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है और इस जनहित याचिका को 25 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है। अदालत को बताया गया कि मामले में प्रगति सही दिशा में हो रही है। अदालत ने कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही को अपने पास स्थानांतरित करने पर विचार कर रही थी, लेकिन अब मामले की स्थिति को देखते हुए ऐसा करना जरूरी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही जारी रहेगी और हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह मामले की कम अंतराल पर निगरानी करे। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित पक्ष दिल्ली और लखनऊ तक सीमित न रहते हुए मौजूदा कार्यवाही में समय-समय पर जारी निर्देशों के संबंध में हलफनामे दाखिल कर सकते हैं। इनमें 25 मार्च और 5 अगस्त 2026 के आदेशों में दिए गए निर्देश भी शामिल हैं। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। तब तक संबंधित पक्षों को सभी रिपोर्ट दाखिल करनी होंगी।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
यह मामला देशभर में भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया गया था। इसके बाद अदालत ने ऐसे हादसों से निपटने के लिए देशभर में लागू होने वाले निर्देश जारी करने की संभावना जताई थी।
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने बताया कि मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने दो मुद्दों पर आदेश दिया था। इनमें आवासीय क्षेत्रों का व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण शामिल था। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के सत्य निकेतन से जुड़े जनहित याचिका मामले में दिए आदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हुई है और स्थिति आगे बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने दी क्या दलील?
एमिकस क्यूरी ने बताया कि हाईकोर्ट ने नगर निगम को पीजी और छात्रावासों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि पीजी के अलावा जिम और कोचिंग सेंटर समेत चार अन्य मुद्दे भी हैं। उन्होंने कहा कि कुछ इमारतों में बड़ी संख्या में लोग काम कर रहे थे और अवैध निर्माण को गिराने की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निगरानी जारी रखी जानी चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली नगर निगम ने कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि यह स्थानीय मामला है, इसलिए इसे दिल्ली हाईकोर्ट के पास ही रहने दिया जा सकता है। इस पर न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि अदालत के रुख को समझने में दो महीने बाद स्थिति स्पष्ट होगी और भरोसा रखने की जरूरत है। मेहता ने कहा कि उन्होंने इस मामले को कभी विरोधी पक्ष की तरह नहीं लिया।
अवैध निर्माणों पर की जा रही है क्या कार्रवाई?
एमिकस क्यूरी ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से हलफनामे के जरिये बताना चाहिए कि अब तक कितना काम हुआ है, ताकि उसकी निगरानी की जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि रिपोर्ट अगली तारीख पर हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल की जाएगी। एमिकस क्यूरी ने कहा कि हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश केवल पीजी तक सीमित है, जबकि पहले के आदेश अवैध निर्माण से भी जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि चार मंजिल से ऊपर के अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की जा रही है।