उच्चतम न्यायालय ने शारदा चिटफंड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के आवेदन पर शुक्रवार को एयरटेल और वोडाफोन से जवाब मांगा है। जांच ब्यूरो ने इन दोनों सेवा प्रदाताओं पर सारदा चिटफंड मामले की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष मोबाइल सेवा प्रदाताओं ने इन आरोपों से इनकार किया। इस पर पीठ ने सीबीआई की अर्जी को आठ अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
इससे पहले, जांच ब्यूरो की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पूरी तरह से अराजकता की स्थिति है और कानून व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पुलिस ने कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टीएमसी के एक नेता की पत्नी के सामान की जांच करने पर सीमा शुल्क विभाग के एक अधिकारी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया था।
मेहता ने कहा कि यह पूरी घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड है। जांच एजेंसी ने हाल ही में इस घोटाले के सिलसिले में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से की गई पूछताछ से संबंधित प्रगति रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी थी।
शीर्ष अदालत ने 26 मार्च को राजीव कुमार से पूछताछ के बारे में जांच ब्यूरो की प्रगति रिपोर्ट में किए गए खुलासे को ‘बहुत ही गंभीर’ बताते हुए कहा था कि यदि उसके सामने कुछ बहुत ही गंभीर तथ्य पेश किए जाते हैं तो वह इनके प्रति आंखें मूंदे नहीं रह सकता।
न्यायालय ने जांच एजेंसी को राजीव कुमार के खिलाफ उचित राहत के लिए आवेदन दस दिन के भीतर आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया था। कुमार पहले इस चिटफंड घोटाले की जांच के लिए राज्य के विशेष जांच दल के मुखिया थे।
शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव और कुमार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही खत्म करने से इनकार कर दिया था। इससे पहले, न्यायालय ने सीबीआई निदेशक को इस मामले में इन अधिकारियों द्वारा न्यायालय की कथित अवमानना के बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने जांच ब्यूरो के मुखिया के जवाब और कुमार से हुई पूछताछ से संबंधित रिपोर्ट का अवलोकन किया था। जांच ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर अधूरी जानकारी उपलब्ध कराने और विवरण के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही है।