बीएमसी ने बुधवार को कंगना रनौत का मुंबई स्थित दफ्तर तोड़ दिया। माना जा रहा था कि बॉलीवुड अभिनेत्री द्वारा पार्टी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेकर दिए गए बयान से शिवसेना नाराज है और इस कार्रवाई के पीछे उसका ही हाथ है। हालांकि, आज शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि कंगना के ऊपर की गई कार्रवाई का शिवसेना से कोई लेना-देना नहीं है।
संजय राउत ने गुरुवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, कंगना रनौत के कार्यालय पर कार्रवाई बीएमसी द्वारा की गई है। इसका शिवसेना से कोई संबंध नहीं है। आप इस पर मेयर या बीएमसी आयुक्त से बात कर सकते हैं।
गौरतलब है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बुधवार को बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत का दफ्तर तोड़ दिया। बीएमसी ने उनके कार्यालय में 14 उल्लंघन बताए हैं। जिसमें रसोई के लिए चिन्हित स्थान पर शौचालय बनाना और शौचालय के लिए चिन्हित जगह पर दफ्तर सेटअप करना शामिल है।
मंबई पुलिस आयुक्त ने शरद पवार के साथ की बैठक
वहीं, मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने आज एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। यह बैठक मुंबई के वाई बी चव्हाण केंद्र में करीब 20 मिनट तक चली। बैठक में किन बातों पर चर्चा हुई, उसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब हाल में कई दिग्गज नेताओं को धमकी भरे फोन कॉल आए हैं।
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क्या है राउत और कंगना के बीच विवाद की वजह
दरअसल, कंगना रनौत और शिवसेना सांसद संजय राउत के बीच कुछ दिनों से जुबानी जंग जारी है। ऐसे में कंगना ने कहा था कि उन्हें बॉलीवुड माफिया से ज्यादा मुंबई पुलिस से डर लगता है। इसपर राउत ने कहा था कि यदि उन्हें मुंबई में डर लगता है तो उन्हें वापस नहीं आना चाहिए। पलटवार करते हुए अभिनेत्री ने कहा था कि मुंबई पीओके है क्या।
कंगना ने तीन सितंबर को ट्वीट कर कहा था, 'शिवसेना नेता संजय राउत ने मुझे खुली धमकी दी है और मुंबई वापस न आने के लिए कहा है। पहले मुंबई की सड़कों पर आजादी के नारे लगे और अब खुली धमकी मिल रही है। आखिर मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) जैसा क्यों महसूस कर रही है?'
इसके बाद राउत ने कंगना के बयान की शिवसेना के मुखपत्र सामना में आलोचना करते हुए लिखा था कि अभिनेत्री मुंबई में रहती हैं, इसके बावजूद शहर के पुलिस बल की आलोचना करना विश्वासघात और शर्मनाक है। उन्होंने लिखा था, 'हम विनम्र निवेदन करते हैं कि वे मुंबई न आएं। यह मुंबई पुलिस का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है। गृह मंत्रालय को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।'