महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने शनिवार को सीएम उद्धव ठाकरे पर धमकाने का आरोप लगाया। अब फडणवीस के इस बयान पर शिवसेना के सांसद संजय राउत ने पलटवार किया है।
राउत ने कहा कि जब फडणवीस मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने धमकी दी थी कि उनके पास सभी राजनीतिक विरोधियों की कुंडली है। यह किस तरह की भाषा है? उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की फडणवीस की मांग पर भी प्रहार किया। राउत ने पूछा कि वह किस तरह का मिसाल कायम करना चाहते हैं?
बता दें कि इससे पहले फडणवीस ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया था कि उन्होंने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को छोड़कर कोई ऐसा मुख्यमंत्री नहीं देखा जो विपक्ष को इतना धमकाता हो। मुख्यमंत्री ने अपने मुखपत्र सामना में जो इंटरव्यू दिया है।
उसमें हमें उम्मीद थी कि सरकार यह बताएगी उसने क्या-क्या किया है और आगे किस तरह के काम किए जाने हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ पूरे इंटरव्यू के दौरान सिर्फ दूसरे लोगों पर आरोप ही लगाए गए।
महाराष्ट्र के इतिहास में ऐसा धमकी देने वाला मुख्यमंत्री कभी नहीं हुआ है। दशहरा के भाषण से लेकर कल तक के इंटरव्यू में जिस तरह से धमकी दी गई है। यह किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता है। उन्हें 5 साल सरकार चलानी है वे चलाएं लेकिन किसी को धमकी ना दें।
किसानों व मराठा आरक्षण पर पूरी तरह फेल उद्धव सरकार: फडणवीस
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में किसानों व मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर निशाना साधा। भाजपा नेता ने शनिवार को महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार का एक साल पूरा होने पर कहा, उद्धव सरकार किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में नाकाम रही है।
सरकार ने उनकी पीड़ा की पूरी तरह अनदेखी की है। कीटों के हमले में कपास और सोयाबीन की फसलें बर्बाद हो गई, लेकिन किसानों को कोई मदद नहीं दी गई। यह सरकार मराठा आरक्षण के मुद्दे पर भी पूरी तरह नाकाम साबित हुई।
फडणवीस ने कहा, मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के कुछ मंत्री जानबूझकर विरोधाभासी बयान दे रहे हैं, ताकि सरकार की नाकामी को छुपाया जा सके। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पूरी तरह घुटने टेक दिए। मैंने उद्धव के अलावा आज तक कोई ऐसा मुख्यमंत्री नहीं देखा, जो विपक्ष को धमकाता है।
हाल ही में सामना में उनके इंटरव्यू ने सांविधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। अर्नब मामले में सुप्रीम कोर्ट व कंगना रणौत मामले में हाईकोर्ट के हालिया आदेश राज्य के हालातों को बयां करने के लिए काफी हैं।