संजय अभिज्ञान, संपादक, अमर उजाला देहरादून: चारधाम परियोजना को कुंभ से पहले पूरा किया जाना था, 2019 में इसे पूरा होना था। कुंभ शुरू होने को है और प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है और न ही हरिद्वार के आसपास सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा हुआ है।
नितिन गडकरी: हरिद्वार बाईपास और सड़क से जुड़े पुराने ठेकेदार से काम वापस ले लिया गया है। इसके पास मेरे मंत्री बनने से पहले ही ठेका था लेकिन काम बहुत धीमा था। इसलिए हटा दिया गया। नया टेंडर निकाला गया। कुंभ से पहले काम पूरा हो जाएगा। चारधाम प्रोजेक्ट समय से पूरा नहीं हुआ इसके कई कारण हैं। कई बार छोटी-छोटी बातों पर कोर्ट स्टे ले लिया गया। कभी हाईकोर्ट का स्टे तो कभी दिल्ली में ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला चला जाता है। ये सड़क बनेगी तो बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री यहां हम सालभर जा सकेंगे। औली के जोशीमठ को विकसित करने को लेकर मैंने खुद सीएम से बात की ताकि यह दावोस जैसा बन सके। मैं चाहता हूं कि विकास भी हो और पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा जाए। एक पेड़ टूटा तो 10 लगाना भी चाहते हैं। केदारनाथ के पास टनल पर भी काम चल रहा है। बीआरओ का इसमें बहुत सहयोग है। पिथौरागढ़-मानसरोवर रूट पर पहाड़ की कटाई का काम पूरा हो चुका है और अगले माह में वहां भी सड़क बन जाने की आशा है।
संजय पांडे, संपादक, हरियाणा-पंजाब: दिल्ली से पानीपत तक नेशनल हाइवे को 12 लेन करने का प्रोजेक्ट शिलान्यास 2015 में हुआ था, लेकिन इसमें देरी हो रही है। इसे 2019 तक पूरा होना था। कब पूरा होगा ये काम?
नितिन गडकरी: दिल्ली के मुकरबा चौक से पानीपत तक मुख्य सड़क आठ लेन व दोनों ओर दो-दो सर्विस लेन की योजना पर काम शुरू कराया गया था लेकिन कंपनी काम नहीं कर सकी। इस कारण अब कंपनी को बदल दिया गया है। नई कंपनी काम शुरू करेगी और नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का काम तेजी से किया जाएगा। नेशनल हाईवे-44 का दिल्ली से पानीपत तक चौड़ीकरण का काम जल्द तेजी पकड़ेगा। इसका निर्माण होने से आए दिन लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा और दुर्घटनाएं कम हो जाएंगी। देश के काफी व्यस्त रहने वाले नेशनल हाईवे-44 का विकल्प जल्द तैयार करने के लिए काम शुरू कराया जाएगा। यह दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेस-वे होगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम हो चुका है। निर्माण शुरू होना बाकी है। साथ ही पंजाब के जालंधर से अजमेर तक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेगा, जिससे मुंबई सीधे पहुंचा जा सके।
दिल्ली-मुंबई हाईवे के लिए पायलट प्रोजेक्ट इलेक्ट्रिक हाईवे बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क पर एक ट्रैक होगा। उसपर टच होता जाएगा और ट्रक 20 किलोमीटर तक चार्ज होता रहेगा। 20 किमी. के बाद वो 200 किमी. इलेक्ट्रिक पर चलेगा। फिर वो 20 किमी चार्ज होगा। यह हाईवे सोहना से शुरू होगा। करीब एक लाख करोड़ लागत का यह हाईवे है। यही हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात से होकर गुजरेगा। यह अभी प्रयोग में है।
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से काफी प्रदूषण होता है। इस समस्या के हल के लिए पराली से बायो सीएनजी बनाने का प्रोजेक्ट लुधियाना में जल्द शुरू किया जाएगा। इसका उद्घाटन करने मैं खुद जाऊंगा। ऐसे प्रोजेक्ट नागपुर में लगाए हुए हैं जिनसे बस और ट्रक चल रहे हैं। देश में प्रदूषण कम होना चाहिए और यही मेरा लक्ष्य है। पराली से बायो सीएनजी बनाने से प्रदूषण कम होगा और किसानों को फायदा भी होगा। पांच टन पराली से एक टन बायो सीएनजी निकलती है। इसके साथ ही चावल से इथेनॉल तैयार होता है तो उस पर भी काम कर सकते हैं। 500 डिस्टलरी लगा रहे हैं जो हरियाणा व पंजाब के लिए बेहतर प्रोजेक्ट हो सकते हैं।
राजेंद्र त्रिपाठी, संपादक, मेरठ : आपने 21 फरवरी 2019 को मुजफ्फरनगर से पानीपत-खटीमा राजमार्ग 507 की घोषणा की थी जिसमें 4500 करोड़ का खर्चा होना था। यह काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। मुजफ्फरनगर से रुड़की तक का काम भी पूरा नहीं हुआ है। मेरठ से पौड़ी के लिए एक हाईवे बन रहा था जो चीन बॉर्डर तक जाता है। वह काम भी कई सालों से अटका पड़ा है।
नितिन गडकरी : मेरठ से लेकर मुजफ्फरनगर और हरिद्वार तक जो सड़क जाती है उसपर मैं खुद गया हूं। वहां एक मस्जिद थी जिसे लेकर काफी समय तक काम रुका रहा। मेरठ-पौड़ी मार्ग पर अटके निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। मेरठ-पौड़ी मार्ग चीन की सीमा तक जाता है और यह महत्वपूर्ण है। मेरी जानकारी में नहीं था, कहां अटका है, इसकी जानकारी जरूर ली जाएगी।
गंग नहर से जल परिवहन शुरू करने के सवाल पर गडकरी ने कहा, हमारे देश में इसका ढांचा विकसित नहीं हो पाया है। नदियों पर जो पुल बने हैं वो सपाट हैं, इन्हें तोड़कर गोलाकार बनाना होगा तभी परिवहन संभव हो पाएगा। हमने वाराणसी में हल्दिया तक इसपर काम किया है। अगर सड़क से जाने के लिए खर्चा 10 रुपये है, रेलवे से 6 रुपये है तो पानी के लिए एक रुपया है। अगर हम एलएनजी ईंधन पर ले आएंगे तो खर्चा 50 पैसा आएगा। क्लीन गंगा मिशन पर मैंने 70 फीसदी काम किया। कानपुर से वाराणसी तक गंदा पानी जाता था। वाराणसी में सात और कानपुर में 6 प्रोजेक्ट लगाए हैं। अभी मेरे पास ये मंत्रालय नहीं है। अगर काम किया जाए तो जलमार्ग से दिल्ली से आगरा पहुंचने में एक घंटे का समय लगेगा।