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BMW ग्रुप चेन्नई प्लांट साल के आखिर तक इस्तेमाल करेगा 100 फीसदी 'ग्रीन बिजली', जानें कैसे बन रहा है इको-फ्रेंडली

Tue, 09 Jun 2020 04:42 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

BMW Group अपने चेन्नई प्लांट में सतत विकास को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। अनेक अभियानों के जरिए BMW ग्रुप चेन्नई ग्रीन और टिकाऊ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने के लिए कोशिशें कर रहा है। हालांकि इनकी कोशिशें रंग ला रही हैं और काफी ज्यादा बचत की जा चुकी है, लेकिन यह प्लांट का लक्ष्य इस साल के आखिर तक 100 फीसदी ग्रीन बिजली इस्तेमाल करना है। इसने जल के संरक्षण और पेड़ लगाने और पर्यवारण को हरा-भरा बनाने के लिए नए अभियान की शुरुआत की है। 
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2 Solar Photovoltaic System at BMW Group Plant Chennai - फोटो : BMW
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विस्तार
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BMW ग्रुप ने एक बयान में कहा कि कंपनी का प्लांट चेन्नई अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए निरंतर अक्षय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने पर केंद्रित है। कंपनी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में, यहां लगातार पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का सतत विकल्प ढूंढा है और उसे प्रयोग में लाया गया। मौजूदा समय में प्लांट अपनी 40 फीसदी बिजली की जरूरत को 1350 kw सोलर फोटोवोल्टेक सिस्टम से पूरा करता है। BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई 2020 के आखिर तक 100 फीसदी ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी प्लांट बनने के लिए काम कर रहा है। विभिन्न सरल एवं स्मार्ट उपाए प्रस्तुत करके, प्लांट ने अपने बिजली के उपभोग में और कमी कर दी है। LED लाइट्स लगाकर बिजली के उपयोग में 50 फीसदी तक की बचत की गई। इसके अलावा ताजा हवा वाले पंखों को एनर्जी एफिशियंट हाई-वॉल्यूम लो-स्पीड (HVLS) पंखों से बदला गया, जिससे वैंटिलेशन सिस्टम में 30 फीसदी बिजली की बचत हुई। 
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'भविष्य में निवेश'
BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई के मैनेजिंग डायरेक्टर थॉमस दोसे ने कहा, "BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई के लिए शब्द 'सस्टेनेबल प्रोडक्शन' का मतलब हमारे भविष्य में निवेश करना है। 2007 से हमारे संयंत्र ने निरंतर आधुनिक टेक्नॉलॉजी, कठोर प्रक्रियाओं एवं दक्षता से रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) के उपभोग में कटौती की है। यह प्रतिबद्धता हमारे व्यापार मॉडल और उत्पादन की प्रक्रियाओं में स्पष्ट कार्यों द्वारा समन्वित है। हमें चुनौतियां मालूम हैं और हम निरंतर ऊंचे लक्ष्य स्थापित करके उनका सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं। BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई के लिए ग्रीन भविष्य का यह मंत्र है।" 

पानी की कमी एक गंभीर समस्या
चेन्नई में पानी की कमी एक गंभीर समस्या है। BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई का कहना है कि वे जिम्मेदारीपूर्वक कार्य कर इसके प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक समधानों पर निरंतर काम कर रहे हैं। प्लांट में जल संरक्षण के उपाय तीन तरीकों से किए जा रहे हैं। इनमें बारिश के पानी का इस्तेमाल, ताजा पानी का संरक्षण और पानी का ट्रीटमेंट शामिल है। BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई के पास दो स्थानों पर बारिश के पानी के संग्रहण के तालाब हैं, जिनकी कुल क्षमता 14,25,000 लीटर है। इस उद्देश्य के लिए बारिश का पानी एकत्रित करने के लिए स्थलों पर टैंक लगाए गए हैं। अभी तक 3,40,000 लीटर से ज्यादा रेनवाटर एकत्रित किया जा चुका है, जिसका उपयोग वाटर लीक टेस्ट एवं अन्य जरूरतों के लिए किया गया है। 

पानी होता है रिसाइकल
प्रोडक्शन में लगने वाला प्रोसेस वाटर प्लांट की ट्रीटमेंट सुविधा में पूरी तरह से रिसाइकल किया जाता है और वापस प्रक्रिया में लिया जाता है। सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी भी ट्रीट किया जाता है और गार्डनिंग एवं लैंडस्केपिंग में इस्तेमाल किया जाता है। प्लांट में स्थापित किए गए सेंसर आधारित नल 8 KL (किलोलीटर) तक पानी की बचत करते हैं। कुल मिलाकर इन तीन तरीकों से वर्ष 2016 से 2019 के दौरान पानी के इस्तेमाल में 45 फीसदी से ज्यादा कमी आई है, जो 40825 KL से कम होकर 20594 KL तक पहुंच गया है। 

'वाटर टेबल' को बढ़ाने पर जोर
2020 की शुरुआत में एक नया रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट क्रियान्वित किया गया, जो 2000 किलोलीटर तक पानी एकत्रित करता है और प्लांट की 40 फीसदी जरूरत को पूरा करता है। प्लांट की टीम, महिंद्रा वल्र्ड सिटी में 10 स्थानों पर रिचार्ज इंजेक्शन कुआं प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जो बाद में बढ़ा दिए जाएंगे। पानी निकालने के अलावा इस तरह के कुएं बारिश के पानी को नियंत्रित तरीके से जमीन में पहुंचाते हैं और वाटर टेबल (जमीन में पानी का स्तर) को सामान्य स्तर पर लाते हैं। जल संरक्षण की अन्य योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इनमें सीवेज ट्रीटेड प्लांट का आधुनिकीकरण शामिल है ताकि रिसाइकल किए गए पानी को टॉयलेट फ्लशिंग के लिए एवं ग्रे वॉटर यूटिलाइजेशन लैंडस्केपिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सके। 
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पर्यवारण को हरा-भरा बनाने की कोशिश
BMW ग्रुप प्लांट चेन्नई में 7.7 एकड़ का ग्रीन एरिया है, जो कुल क्षेत्र का 25 फीसदी है। बायोडाइवर्सिटी पायलट प्रोजेक्ट के तहत 31 अलग-अलग प्रजातियों के लगभग 2000 पेड़ों के साथ ग्रीन बेल्ट स्थापित की गई है। एक अन्य ट्री प्लांटेशन अभियान में पेड़ों की लगभग 4,000 स्थानीय प्रजातियां प्लांट में 0.5 एकड़ इलाके में मियावाकी फॉरेस्ट तकनीक से लगाई गई हैं। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें सामान्य से 10 गुना ज्यादा तेजी और 30 गुना ज्यादा घने वन तैयार होते हैं। इससे हर वर्ष 4,000 टन C02 (कार्बन-डाइ-ऑक्साइड) की बचत होगी। हर साल विश्व पर्यावरण दिवस पर पूरी टीम संयंत्र के अंदर व बाहर पेड़ लगाने के लिए एकत्रित होती है।
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