Bengal: भाजपा ने दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों में पश्चिम बंगाल में मारे गए मुसलमानों की संख्या देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक है, यहां तक कि भाजपा शासित राज्यों से भी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने इसके लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया। पढ़ें रिपोर्ट-
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में पश्चिम बंगाल में मारे गए मुसलमानों की संख्या किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, मैं मुसलमानों से अनुरोध करता हूं कि वे पिछले तीन वर्षों में पश्चिम बंगाल में मारे गए अपने समुदाय के लोगों की गणना करें और उस की तुलना देश के अन्य राज्यों के आंकड़ों से करें।
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उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल के इस आंकड़े की तुलना उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों से करें। आप देखेंगे कि इस मामले में पश्चिम बंगाल का आंकड़ा भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है।
'क्या टीएमसी की अंदरूनी गुटबाजी हिंसा की वजह'
भट्टाचार्य ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मुस्लिम कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर उसी समुदाय के अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि मीडिया में इन घटनाओं को अक्सर सत्तारूढ़ टीएमसी के भीतर की 'गुटबाजी' की रिपोर्ट बताकर पेश किया जाता है।
शुभेंदु अधिकारी पर एफआईआर की आलोचना की
भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ कोलकाता के एक थाने में दर्ज प्राथमिकी को लेकर माकपा की आलोचना भी की। यह प्राथमिकी माकपा के एक युवा नेता ने दर्ज कराई है। प्राथमिकी में उन्होंने अधिकारी पर मंगलवार को डोल यात्रा उत्सव के दौरान सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
'अप्रासंगिक हो चुकी माकपा'
उन्होंने कहा, मैं आज यहां विपक्ष के नेता का बचाव करने के लिए नहीं आया हूं। लेकिन, मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि उन्होंने सांविधानिक सीमाओं का पूरी तरह से पालन किया है। जहां तक माकपा की बात है, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह पार्टी पूरी तरह से अप्रासंगिक हो चुकी है। इसलिए वे इस तरह के हथकंडे अपनाकर खुद को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।