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Sambhal Violence Case: यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की रिपोर्ट, कहा- सार्वजनिक संपत्ति पर है कुआं

Mon, 24 Feb 2025 03:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Sambhal Violence Case: यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि विवादित कुआं मस्जिद के बाहर और सार्वजनिक संपत्ति पर स्थित है। शाही जामा मस्जिद समिति पर आरोप है कि उन्होंने भ्रामक तस्वीरों के जरिए कुएं को मस्जिद के अंदर दिखाने की कोशिश की।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि संभल में विवादित शाही जामा मस्जिद के बाहर स्थित कुआं सरकारी जमीन पर है, जिसे स्थानीय स्तर पर धरणी वराह कूप के रूप में जाना जाता है। मस्जिद समिति इस कुएं को पुनर्जीवित करने पर आपत्ति जताई है। राज्य सरकार ने यहां तक कहा कि संभल शाही जामा मस्जिद भी सरकारी जमीन पर बनी है।

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शीर्ष अदालत में दायर हलफनामा में राज्य सरकार ने कहा, यह कुआं विवादित धार्मिक स्थल के अंदर नहीं, बल्कि पास में है। इस तरह इसका विवादित धार्मिक स्थल-मस्जिद से कोई संबंध नहीं है। यह उन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण 19 कुओं में से एक है, जिनके संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए संभल जिला प्रशासन ने 123.65 लाख करोड़ रुपये की एक योजना बनाई है। कुछ कुओं के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू भी हो गई है। इन कुओं को पुनर्जीवित करने से संभल क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। संभल जिला सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

कोर्ट में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में राज्य ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने भ्रामक तस्वीरें संलग्न की हैं, जो यह दर्शाने का प्रयास कर रही हैं कि विषयगत कुआं विवादित धार्मिक स्थल परिसर के अंदर है। यह कुएं को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया को विफल करने का प्रयास है जो न केवल अवैध है, बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिकी संरक्षण और विकास के लिए भी हानिकारक है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि याचिकाकर्ता ने अपने गलत आवेदन के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति के संबंध में निजी अधिकार बनाने का प्रयास किया है।
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प्राचीन काल से यह सार्वजनिक कुआं
राज्य सरकार ने स्थिति रिपोर्ट में दावा किया है कि यह एक सार्वजनिक कुआं है और मस्जिद/विवादित धार्मिक स्थल के अंदर स्थित नहीं है। वास्तव में, मस्जिद के अंदर से विषयगत कुएं तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि प्राचीन काल से ही सभी समुदाय के लोग इस कुएं का उपयोग करते थे। हालांकि अब इसमें पानी नहीं है। 1978 के सांप्रदायिक दंगों के बाद, कुएं के एक हिस्से के ऊपर एक पुलिस चौकी बनाई गई थी। दूसरा हिस्सा 1978 के बाद भी उपयोग में रहा। 2012 में किसी समय कुएं को ढंक दिया गया था।

हाईकोर्ट के आदेश को छिपाया गया
राज्य सरकार ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 जनवरी को श्री विष्णु हरि मंदिर के मुकदमे से संबंधित सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश का खुलासा किए बिना इस न्यायालय के समक्ष यह आदेश देने के लिए आवेदन दायर किया गया कि मस्जिद की सीढ़ियों या प्रवेश द्वार के पास स्थित निजी कुएं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए और कोई कदम या कार्रवाई न की जाए।

कोर्ट के आदेश पर बनी निरीक्षण समिति
इस साल 10 जनवरी के शीर्ष अदालत के आदेश के बाद राज्य/जिला प्रशासन ने संबंधित कुएं की स्थिति की जांच करने के लिए संभल के एसडीएम, क्षेत्राधिकारी और अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहा है कि मस्जिद/विवादित धार्मिक स्थल की चहारदीवारी के भीतर वास्तव में एक कुआं है, जिसे स्थानीय रूप से यज्ञ कूप के रूप में जाना जाता है। उक्त यज्ञ कूप में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।

संभल पालिका परिषद की रिपोर्ट का दिया हवाला
राज्य सरकार ने संभल नगर पालिका परिषद की 20 फरवरी की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि संभल शहर में जिन 19 कुओं को बहाल करने की मांग की गई है, वे अन्य बातों के साथ-साथ वर्षा जल संचयन, जल पुनर्भरण और सामाजिक-सांस्कृतिक-धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं। पुनरुद्धार योजना के प्रारंभिक चरण में नगर पालिका ने शहर क्षेत्र के सभी कुओं को, जो बंद थे या कीचड़ और कचरे से भरे हुए थे, पूरी तरह से साफ करवा दिया है। सुरक्षा के लिए जालियां लगा दी हैं। कुओं के ऐतिहासिक नाम और ऐतिहासिक महत्व वाले साइनेज बोर्ड लगाए जा रहे हैं।

अगले चक्र में परिक्रमा पथ का निर्माण
राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि अगले चरणों में परिक्रमा पथ का निर्माण, पेयजल सुविधाएं, कुओं के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाने वाले बोर्ड लगाना शामिल होगा। आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के अनुबंध का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि वर्तमान में संभल जिला भूजल स्तर के मामले में डार्क जोन में है और इसलिए भूजल पुनर्भरण के लिए कुओं के जीर्णोद्धार की तत्काल आवश्यकता है। संभल कुआं पुनरुद्धार योजना ऐसे लक्ष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है। राज्य सरकार ने कहा है कि वह क्षेत्र में शांति और सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक कुओं के इस्तेमाल से समुदायों को रोकना उचित नहीं होगा।
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