भारतीय सेना ने ऊपरी असम और मणिपुर में राज्य प्रशासन और नागरिक संस्थाओं के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसका नाम ‘अभ्यास समन्वय शक्ति 2025’ रखा गया है। इस अभ्यास का उद्देश्य सुरक्षा बलों और प्रशासनिक संस्थाओं के बीच तालमेल बढ़ाकर क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करना और आम जनता का भरोसा मजबूत करना है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन ऊपरी असम के लाईपुरी में किया गया।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उद्घाटन सत्र में भारतीय सेना, वायुसेना, जिला प्रशासन, पुलिस, खुफिया एजेंसियां, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, बीआरओ, जीआरईएफ, रेलवे, शैक्षणिक संस्थान और ऑयल इंडिया, आईओसीएल, कोल इंडिया के सुरक्षा अधिकारी तथा स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस साझेदारी का मकसद सभी संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाना है।
मणिपुर में भी होगा अभ्यास
उन्होंने बताया कि इसी तरह का अभ्यास 20 से 30 अगस्त तक मणिपुर में होगा। इसमें आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग की पहल, वन विभाग, नशा उन्मूलन, सिंचाई, सड़क सुरक्षा और सशस्त्र बलों में रोजगार के अवसरों पर चर्चा होगी। इसके अलावा खेल, राज्य पुलिस, सेना और अर्द्धसैनिक बलों के बीच समन्वय तथा ऑपरेशन सद्भावना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।
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10 दिनों तक चलेगा गहन अभ्यास
यह दस दिवसीय अभ्यास केवल औपचारिक नहीं रहेगा, बल्कि इसमें व्यावहारिक अभ्यासों पर भी जोर दिया जाएगा। इसका मकसद संचार चैनलों को और मजबूत करना, मानक संचालन प्रक्रियाओं को सुधारना और आपसी समन्वय से हर स्थिति का बेहतर समाधान निकालना है। इससे प्रशासन और सेना दोनों को आपात स्थितियों से निपटने में और अधिक क्षमता मिलेगी।
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विश्वास और विकास की दिशा में कदम
‘अभ्यास समन्वय शक्ति' केवल सुरक्षा से जुड़ा कदम नहीं है, बल्कि यह जनता और संस्थाओं के बीच विश्वास के बंधन को भी मजबूत करेगा। इसके जरिए सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की तैयारी बढ़ेगी, राष्ट्र निर्माण की दिशा में विकास को गति मिलेगी और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में भी मदद मिलेगी।