फिल्म अभिनेता सलमान खान एवं अन्य फिल्मी सितारों से जुड़े बहुचर्चित काला हिरण शिकार प्रकरण में आखिरकार अब फैसले का समय आ गया है। जोधपुर की कोर्ट ने सभी पक्षों की बहस पूरी होने बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है और फैसला सुनाने के लिए 5 अप्रैल की तारीख तय कर दी है। करीब बीस साल से जारी इस मामले में सलमान, सैफ अली खान, तब्बू व सोनाली बेंद्रे को जेल होगी या राहत मिलेगी, फैसले में सामने आ जाएगा। मामले में लगी धाराओं में अधिकतम छह साल की सजा का प्रावधान है।
जोधपुर के मुख्य न्यायिक मजिट्रेट देवकुमार खत्री की अदालत में बुधवार को कांकाणी गांव में दो काले हिरण का शिकार करने के बीस वर्ष पुराने मामले में सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई। बहस के अंतिम दिन अदालत में लोक अभियोजक भवानी सिंह ने बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा उठाए गए सवालों पर तर्कों व तथ्यों के आधार पर जवाब दिया।
बहस पूरी होने के बाद अदालत ने कहा कि फैसला पांच अप्रेल को सुनाया जाएगा। इस दौरान सलमान के वकील हस्तीमल सारस्वत सहित सैफ अली खान, नीलम, तब्बू व सोनाली के वकील कोर्ट में उपस्थित रहे। इस मामले में सलमान के साथ ही सैफ अली खान, नीलम, तब्बू व सोनाली बेन्द्रे और दुष्यन्त सिंह सहआरोपी हैं।
यह है पूरा मामला
वर्ष 1998 में अपनी फिल्म हम साथ-साथ है कि जोधपुर में चल रही शूटिंग के दौरान सलमान खान पर कांकाणी सहित तीन अलग-अलग स्थान पर हिरण का शिकार करने का आरोप लगा था। दो मामलों की सुनवाई निचली अदालत में पूरी हो चुकी है और सलमान ने सजा के दोनों फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौति दे रखी है। कांकाणी हिरण शिकार मामला अभी निचली अदालत में ही चल रहा है। इस मामले में आरोप है कि जोधपुर से सटे कांकाणी गांव की सरहद में एक अक्टूबर 1998 की रात सलमान ने गोली चला कर दो काले हिरणों का शिकार किया। उस दौरान सैफ अली, नीलम, सोनाली व तब्बू भी उसके साथ वाहन में सवार थे। इन लोगों पर सलमान को शिकार करने के लिए उकसाने का आरोप है। गोली की आवाज सुन ग्रामीण वहां एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि उनके आने पर सलमान खान वहां से गाड़ी लेकर भाग निकले। दोनों हिरण वहीं पड़े रह गए।
अधिकतम छह साल की सजा का प्रावधान
वाइल्ड लाइफ एक्ट की धारा 149 के तहत काला हिरण का शिकार करने पर वर्तमान में सात वर्ष की अधिकतम कारावास की सजा का प्रावधान है। कुछ वर्ष पूर्व तक यह प्रावधान छह वर्ष था। सलमान का प्रकरण चूंकि बीस वर्ष पुराना है। ऐसे में इस मामले में अधिकतम छह वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान ही लागू होगा। वहीं सह आरोपियों के मामलों में भी यह प्रावधान लागू होता है।