फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम मंदिर और गंगा के लिए मैदान में उतरेंगे संत, केंद्र के खिलाफ खोला मोर्चा     

Sun, 03 Jun 2018 03:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
संत
विज्ञापन
चुनावी वर्ष में गंगा और राम मंदिर निर्माण के लिए संतों ने नए सिरे से मोर्चा खोलने की घोषणा की है। देश भर के 300 से अधिक संतों की अगुवाई में शनिवार को अखिल भारतीय संत समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राम मंदिर के निर्माण के लिए संसद में कानून बनाने और बीते डेढ़ साल से लंबित गंगा संरक्षण कानून को लागू करने की मांग की गई है। मांगें नहीं मानने पर संतों ने देश भर में आंदोलन की चेतावनी दी है।
विज्ञापन

 
महामंडलेश्वर रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य और समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राम मंदिर और गंगा कानून पर अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। अगर सुप्रीम कोर्ट आतंकवादियों और एक मुख्यमंत्री के लिए आधी रात को अदालत खोल सकता है तो राम मंदिर मामले की प्रतिदिन सुनवाई क्यों नहीं हो सकती? दोनों संतों ने कहा कि मंदिर निर्माण का सबसे बेहतर तरीका इस बारे में संसद में कानून बनाने की है। अगर सरकार ऐसा नहीं करेगी तो इस मामले में देश भर में आंदोलन छेड़ा जाएगा। 

स्वामी जीतेंद्रानंद ने गंगा मामले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सरकार पर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल पहले गिरिधर मालवीय की अगुवाई में बनी कमेटी ने गंगा संरक्षण कानून का मसौदा तैयार कर सरकार को दे दिया था। मगर यह अब तक गडकरी की मेज पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी गंगा को बचाने के प्रयास में पलीता लगा रहे हैं और सरकार के साथ-साथ गडकरी तमाशा देख रहे हैं। 
विज्ञापन


फतवे के खिलाफ भी गरम 

दोनों संतों ने कहा कि कैराना उपचुनाव में देवबंद की ओर से 37 फतवे जारी किए गए। इससे पहले दिल्ली के आर्क बिशप ने पत्र जारी कर सरकार के खिलाफ चर्च में एक साल तक प्रार्थना कराने के लिए कहा। ऐसे में अब संत समाज की मजबूरी है कि वह भी हिंदू समाज को राजनीतिक रूप से एकजुट करे।  
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें