विपक्ष को भोपाल की भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बहाने एक बड़ा हथियार मिल गया है। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा और धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने बिना प्रज्ञा का नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्शों को लेकर उन्हें चिढ़ाया। गुलाम नबी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जैसे बर्ताव की उम्मीद थी। गुलाम नबी का प्रधानमंत्री मोदी पर यह दोहरा ताना था।
गुलाम नबी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हम 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं। राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में इसका जिक्र किया है। गुलाम नबी ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है, लेकिन इसी के साथ उन्होंने मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के चुनाव के दौरान बोले गए बोल का जिक्र कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा की सांसद ने देश के राष्ट्रपिता के हत्यारे को देश भक्त कहा है। गुलाम नबी आजाद ने सत्ताधारी पार्टी के सांसदों के बोल पर कहा कि वह जो राष्ट्रपिता के बारे में बोल रहे हैं, वह कहते हुए उनकी जुबान जल जाएगी।
सुनाया नेहरू का वाकया
गुलाम नबी ने कहा कि बात 1952 है। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू विधानसभा चुनाव के प्रचार में गए थे। वहां पहुंचे तो उन्हें पता लगा कि कांग्रेस ने गलत प्रत्याशी उतार दिया है। प्रत्याशी पर कुछ आरोप हैं। यह सुनकर नेहरू जी ने पूछा कि क्या कोई और साफ सुथरी छवि का निर्दल प्रत्याशी है? तब जिला अध्यक्ष ने उन्हें एक निर्दलीय प्रत्याशी का नाम सुझाया। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पंडित नेहरू ने फिर वही किया। उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी की बजाय निर्दल प्रत्याशी को वोट देने की अपील की और अपने संबोधन में कहा कि भी कांग्रेस ने गलत प्रत्याशी को टिकट दे दिया है। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह निर्दल प्रत्याशी चुनाव जीत गया।
क्यों मारा नेहरू का ताना?
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को महत्व देने से बचते रहे हैं। भाजपा के नेता भी पंडित जवाहर लाल नेहरू को बड़ा दोषी मानते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली पिछली मोदी सरकार नेहरू को खारिज करके उनकी सरकार में गृहमंत्री सरदार पटेल का कद ऊंचा बढ़ाती रही। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह का नेतृत्व मौजूदा कांग्रेस को नेहरू परिवार के आधिपत्य वाली कांग्रेस मानकर इसे खारिज कर रहा है। माना जा रहा है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के आदर्श को सामने रखकर गुलाम नबी आजाद ने जले पर नमक रख दिया है।