फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sadanand Vasant Date: दाते की सूझबूझ से पकड़ा गया था कसाब, जानें एनआईए के नए प्रमुख के बारे में

Thu, 28 Mar 2024 08:12 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख सदानंद वसंत दाते को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर, 2026 को उनकी सेवानिवृत्ति तक रहेगा। वह दिनकर गुप्ता का स्थान लेंगे, जो 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। पढ़ें उनके बारे में....
विज्ञापन
New NIA chief Sadanand Vasant Date - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महाराष्ट्र कैडर के 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी सदानंद वसंत दाते को 26/11 हमले के दौरान उनकी बहादुरी के लिए याद किया जाता है। आतंकी हमले के दौरान उनकी वीरता के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। दाते ने अजमल कसाब और उसके लश्कर-ए-ताइबा के सहयोगी अबू इस्माइल से संघर्ष किया, उन्हें चोटें आईं और जब तक वह बेहोश नहीं हो गए, तब तक उन्होंने उन्हें रोके रखा। उनकी सूझबूझ के कारण ही कसाब जिंदा पकड़ा गया। 16 साल बाद बुधवार को सदानंद वसंत दाते को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का प्रमुख नियुक्त किया गया। यह एजेंसी मुंबई पर तीन दिनों तक हुए सुनियोजित आतंकी हमले के बाद अस्तित्व में आई थी।
विज्ञापन


26 नवंबर, 2008 की उस भयावह रात को मध्य क्षेत्र के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दाते को एक फोन आया कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) के पास आतंकी अंधाधुंध गोलीबारी कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही 10 आतंकी एक नाव के जरिये मुंबई में घुस आए थे और शहर में फैल गए थे। इस हमले में मुंबई पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे और अशोक कामटे सहित 18 बहादुर बलिदान हुए। 

आतंकियों ने कामा अस्पताल की छत पर कब्जा कर लिया था
जब तक दाते और उनकी टीम सीएसटी पहुंची, तब तक दोनों आतंकी कसाब और इस्माइल वहां से चले गए थे और पास के कामा अस्पताल की छत पर कब्जा कर लिया था। टीम ने उनका वहां तक पीछा किया। उन्हें पता था कि दो लोग वहां हैं, लेकिन उन्हें आतंकियों के पास मौजूद हथियारों और गोला-बारूद के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बहरहाल, दाते के नेतृत्व वाली टीम ने दोनों से मुकाबला करने का फैसला किया। टीम की त्वरित प्रतिक्रिया और निर्णायक कार्रवाइयों ने अस्पताल में मरीजों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुरी तरह घायल होने के बावजूद उन्होंने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को उनके स्थान के बारे में सूचित करने के अलावा दोनों आतंकियों पर गोलीबारी जारी रखी। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें