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मां की बीमारी से प्रेरणा लेकर खड़ा किया अंतरराष्ट्रीय योग संगठन, अब बरस रहे डॉलर

Mon, 06 Aug 2018 04:40 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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सदानंद पुरस्कार लेते हुए - फोटो : Amar Ujala
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यूपी के ओरैया जिले में रहने वाले सदानंद को भी यह मालूम नहीं था कि एक दिन वह अंतरराष्ट्रीय योग संगठन खड़ा करेगा। साल 2003 की बात है, जब उनकी मां को गठिया ने जकड़ लिया था। डॉक्टर, वैद्य और योगचार्यों के चक्कर कटने शुरू हो गए। इस राह में पतंजलि योगपीठ जैसे बड़े संगठन भी आए। मां को आराम लगा, मगर उसकी पीड़ा सदानंद के लिए एक प्रेरणा का काम कर गई। देश में योग की थोड़ी बहुत जानकारी रखने वालों को उसने एकत्रित करना शुरू कर दिया।
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लोगों को ट्रेनिंग दी और फिर उन्हें विदेशों में योगचार्य की जॉब दिलवा दी। भारतीय योग शिक्षकों पर डॉलर की बरसात होने लगी। अब लक्ष्य यह है कि अपने देश के हर गांव-शहर और सरकारी-गैर सरकारी संगठन, सब जगह पर कम से कम एक योगचार्य रहे, जो लोगों को मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ रख सके। इस योजना पर काम शुरू कर दिया है।

मगर अभी तक दिल्ली में खुद का दफ्तर तक नहीं है

ओरैया स्थित गेल में कार्यरत सदानंद, जो कि योग संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, का कहना है, आर्थिक दिक्कतों की वजह से वे दिल्ली में अभी तक स्थायी दफ्तर तक नहीं ले सके हैं। एक योगचार्य ने मदद करते हुए नजफगढ़ में एक कमरा हमें दिला दिया है। चूंकि वह दिल्ली के बाहरी किनारे पर स्थित है, इसलिए वहां जाना संभव नहीं हो पाता।
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जब कोई बैठक, वर्कशॉप या सम्मेलन होता है तो गांधी पीस फाउंडेशन का हॉल किराए पर ले लेते हैं। दो साल पहले हमने कुछ इसी जगह पर इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ योग प्रोफेशनल (आईएफवाईपी) की स्थापना की थी। 

हमारे योगचार्यों ने विदेशों में मचाई धूम

First Yoga Professionals meet 2016 - फोटो : Amar Ujala
मकसद था कि योग को सर्वसुलभ बनाना

आईएफवाईपी बनने के बाद अगला कदम योग को सर्वसुलभ बनाना था। देश-विदेश हर जगह पर योग को पहुंचाने का लक्ष्य तय कर दिया। यह थोड़े से योगचार्यों के वश की बात तो थी नहीं। इसके लिए देश-विदेश के उन सभी लोगों को साथ में लेने का काम शुरू हुआ, जिन्हें योग की हल्की-फुल्की जानकारी थी। बहुत से लोगों को ‘डिप्लोमा-डिग्री इन योग’ कराया गया।

आयुष मंत्रालय ने तभी क्यूसीआई द्वारा योग प्रोफेशनल प्रमाणन की योजना शुरू कर दी। बतौर सदानंद, इससे हमें दुनिया के योगचार्यों से संपर्क करने का मार्ग मिल गया। अभी तक करीब 25 हजार से ज्यादा योगचार्य प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर आईएफवाईपी से जुड़ चुके हैं। इनमें छात्र, डॉक्टर, प्रोफेसर और एमएनसी कर्मी भी शामिल हैं। 

हमारे योगचार्यों ने विदेशों में मचाई धूम

संगठन ने ट्रेनिंग देकर अमेरिका, ब्राजील, जापान, श्रीलंका, भूटान, रूस एवं सहयोगी देश, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अफ्रीका, हंगरी, बुलगारिया, स्पेन व फिजी में योगचार्यों को भेजा है। कुछ योगचार्यों दो-तीन सप्ताह यानी शॉर्ट टर्म तो कुछ डेढ़-दो साल की लॉंग टर्म के लिए विदेश जाते हैं। शॉर्ट टर्म वालों को 40-50 हजार रुपये प्रतिमाह और लंबी अवधि के लिए जाने वाले डेढ़ से दो लाख रुपये प्रतिमाह कमा लेते हैं। पिछले दो साल में सौ से अधिक योगचार्यों को शॉर्ट टर्म के लिए भेजा जा चुका है, जबकि अस्सी योग विशेषज्ञ लॉंग टर्म के लिए 60 देशों में अपनी सेवा दे रहे हैं।

सभी योगचार्य आईसीसीआर-विदेश मंत्रालय के माध्यम से ही दूसरे देशों में भेजे जाते हैं। इस साल करीब डेढ़ सौ योगचार्यों को विदेशों में भेजा जाएगा। रिपब्लिक ऑफ कोरिया सियोल में सोमा दत्ता, बहरीन में रुद्रीश कुमार सिंह, सेशेल्स हाईकमीशन विक्टोरिया में ललिता संचेती, यूएसए में एंजेला माजरेकर, पापुआ न्यूगिनी में अजित सिंह अहलावत, नेपाल में संजय माचे और पीपी कृष्णन व हंगरी में अंकिता सूद योग की मुहिम को आगे बढ़ा रही हैं।
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विदेश जाने के लिए ये योग्यताएँ जरूरी

सदानंद - फोटो : Amar Ujala
किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से योग में डिग्री, डिप्लोमा का प्रमाण-पत्र व अनुभव होना चाहिये। चयन इंटरव्यू प्रक्रिया के तहत होता है। संस्कृत और अंग्रेजी जानने वालों को प्रमुखता दी जाती है। फेडरेशन के अस्तित्व में आने से पूर्व इस तरह की योजना की जानकारी सिर्फ गिने चुने योग टीचर्स को ही थी। आज फेडरेशन के प्रचार के कारण पूरे देश के योग शिक्षकों को देश विदेश में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है।

आईएफवाईपी के महासचिव सत्यनारायण यादव का कहना है कि भविष्य में हमारा प्रयास योग के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना रहेगा। इसके लिए हम सरकारी, कॉर्पोरेट, चिकित्सा, शिक्षा एवं दूसरे कई क्षेत्रों में प्रयास कर रहे हैं।

बीयर योग के बारे में लोगों को चेता रहे हैं

फेडरेशन एक और अति महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, वो है योग और भारतीय अस्मिता को चोट पहुंचाने वाले आयोजन, जैसे बीयर योग, आदि के बारे में लोगों को सचेत करना। ये ऐसे शर्मनाक कार्यक्रम हैं जो कि भारतीयता को गहरी चोट पहुंचाते हैं।

आईएफवाईपी ने स्वत: संज्ञान लेकर इंदौर में होने वाले बीयर योग कार्यक्रम को अन्य सामाजिक संगठनों की मदद से रुकवाया। इसके बाद पुणे में होने वाले ऐसे आयोजन को रुकवाया गया।
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