ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां कादरी अजहरी मियां के अस्पताल में भर्ती होने के बाद मस्जिदों में जुमे की नमाज के दौरान उनकी सेहतयाबी के लिए दुआएं की गई, लेकिन खुदा की मर्जी शायद कुछ और थी। शाम को ही अचानक उनके न रहने की खबर आई तो उनके अकीदतमंद भारी सदमे से घिर गए। पहले तो लोगों को इस खबर पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने अपने जरियों से इसे तस्दीक किया तो आंखों से आंसू बह निकले। शहर के कोने-कोने से भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। सबका रुख दरगाह आला हजरत की ओर था। दरगाह परिसर में अजहरी मियां के घर के बाहर हजारों की भीड़ इकट्ठी हो गई। तमाम लोग अपना गम नहीं संभाल सके और रोते-बिलखते नजर आए।
अजहरी मियां का विसाल शाम करीब साढ़े सात बजे अपने घर पर हुआ। बृहस्पतिवार को उन्हें अस्पताल से घर लाया गया था। बताया जाता है कि शुक्रवार को वह पूरे दिन ठीक-ठाक रहे। जो लोग उनसे मिलने आए, उनसे बातचीत भी की। शाम को वह मगरिब की नमाज का वक्त होने से ठीक थे। मगर जब अजान होने के बाद वह नमाज अदा करने के लिए उठे तभी अचानक निढाल हो गए। घरवाले उन्हें संभालने में जुटे और डॉक्टर को बुलाया गया लेकिन डॉक्टर के आने तक उनकी रूह परवाज कर गई। आठ बजे तक उनके विसाल की खबर बिजली की तरह पूरे शहर में फैल गई। इसके साथ ही मस्जिदों से गमजदा इमामों ने लरजती आवाज में उनके विसाल की खबर एलान शुरू किया तो शहर भर से भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। कई इमाम मस्जिदों में एलान करते-करते रो पड़े।
नौ बजे तक दरगाह के आसपास की गलियों में पैर रखने को भी जगह नहीं बची। इस बीच आसपास के दूसरे शहरों से भी अजहरी मियां के अकीदतमंदों ने भी बरेली पहुंचना शुरू कर दिया। दरगाह के बाहर लोग अल्लाह से उन्हें बुलंद दर्जा देने की दुआ करते नजर आए। तमाम लोग बुरी तरह रो-बिलख रहे थे। कुछ लोगों को तो संभालना तक मुश्किल हो गया। देर रात तक दरगाह के आसपास की गलियां इस कदर ठसाठस भरी हुई थीं कि किसी का दरगाह परिसर में उनके घर तक आना-जाना मुमकिन नहीं रह गया था। दूर-दूर से आए तमाम लोग उनके घर तक नहीं पहुंच पाए।