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धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव के मुद्दों पर सवाल तय करेगा सुप्रीम कोर्ट

Mon, 03 Feb 2020 01:23 PM IST
Sneha Baluni एएनआई, नई दिल्ली
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सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि उसकी नौ सदस्यीय पीठ धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव के मुद्दों से जुडे़ कानूनी सवालों की रूपरेखा तय करेगी। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश देने के फैसले से उठे प्रश्न पर व्यापक मसले अधिकार बनाम आस्था को निर्धारित करने का फैसला किया है। चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि वह पीठ के सदस्यों के साथ बातचीत कर कानूनी प्रश्न तय करेंगे। पीठ द्वारा यह जानकारी वृहस्पतिवार को दी जाएगी।

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पीठ ने कहा, हम इस मुद्दे पर भी विचार करेंगे कि क्या फैसला बड़ी बेंच के पास सुनवाई के लिए भेजा जा सकता है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन और श्याम दीवान ने पीठ से कहा कि किसी फैसले पर पुनर्विचार करने करते हुए मसले को बड़ी पीठ भेजने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

उनका कहना था कि 28 सितंबर 2018 को पांच सदस्यीय पीठ ने फैसला दिया था। जब इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई तो पांच सदस्यीय पीठ ने इसका निपटारा करने की बजाए इसे बड़ी पीठ के पास भेज दिया।
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इस दलील का वरिष्ठ वकील के परासरन, अभिषेक मनु सिंघवी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित अन्य ने विरोध किया। उनका कहना था कि जनहित याचिकाओं पर कोर्ट ऐसा रेफरेंस कर चुका है। 

बड़ी पीठ के पास भेजा जाए या नहीं, यह भी तय करेगी पीठ

इस पर पीठ ने कहा कि वह यह भी तय करेगी कि क्या पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करते हुए मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है या नहीं? नौ सदस्यीय पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एमएम शांतानागौदर, जस्टिस एसए नजीर, जस्टिस सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। दरअसल, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के खतना और पारसी महिलाओं के गैर-पारसी से शादी करने पर अग्निमंदिर (पूजा स्थल) में जाने से रोक से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही है।

जब वकीलों में हुई जमकर बहस

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, सभी पक्षों में सवालों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। पीठ को सवाल खुद तय करने चाहिए जिस पर सुनवाई हो। जरूरी नहीं कि इन्हें खुली अदालत में तय किया जाए। इस पर वकील फली नरीमन ने कहा कि सबरीमाला में महिलाओं के जाने पर पुनर्विचार करते हुए दूसरे धर्मों की परंपराओं को इसमें जोड़ दिया गया। इसकी जरूरत नहीं थी।

हम सबरीमाला नहीं, बडे़ मुद्दे तय करेंगे

पीठ ने कहा, हम यहां सबरीमाला फैसले पर पुनर्विचार के लिए नहीं, बल्कि बड़े मुद्दे को तय करने के लिए बैठे हैं, जिसमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग जैसी मुस्लिम महिलाएं भी मस्जिद में प्रवेश मांग रही हैं। इसके साथ ही दाउदी बोहरा में महिलाओं का खतना और पारसी महिलाओं के दूसरे धर्म में शादी करने पर अग्यारी पर रोक को चुनौती दी गई है। एक वर्ग का कहना है कि मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में तो प्रवेश कर सकती है लेकिन वे पुरुषों के साथ इबादत नहीं कर सकतीं।

ये ऐसे मुद्दे, जिसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा: सिब्बल

वहीं, वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ये ऐसे मुद्दे हैं जिसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा। आप जो भी बोलेंगे उसका असर सभी पर होगा। इसका असर जाति व्यवस्था पर भी पड़ेगा, आप इसे कैसे तय करेंगे? इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हम इस आपत्ति को एक मुद्दे के रूप में समझेंगे और सुनेंगे भी। हम केवल उन लेखों की व्याख्या तय करने जा रहे हैं जो सबरीमाला और अन्य मामलों में भी लागू किए गए हैं।

इस मामले पर हो रही सुनवाई

2018 में सबरीमाला मंदिर में दिए गए फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करते हुए गत वर्ष 14 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने कहा था कि सबरीमाला की तरह मुस्लिम महिलाओं के दरगाह और मस्जिदों में प्रवेश, दाउदी वोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना, गैर पारसी युवक से शादी करने वाली पारसी महिलाओं को होली फायर में प्रवेश पर रोक आदि भी मसले हैं, इनका भी निपटारा आवश्यक है।

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