सबरीमाला मंदिर सोमवार की रात बंद कर दिया गया। हालात वही रहे जैसे पहले थे। रजस्वला आयु वर्ग की कोई भी महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के मुताबिक 10 साल 50 साल की उम्र तक की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया था। महिलाओं ने इस दौरान कई बार प्रवेश करने की कोशिश भी की लेकिन वह नाकाम रहीं।
सोमवार को भी आंध्र प्रदेश से पांच महिलाएं भगवान अयप्पा के दर्शन की आस से आई थीं। लेकिन उन्हें बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। वह तीर्थ यात्रा पर निकले समूह के साथ थीं और सबरीमाला की स्थिति से अंजान थीं।
इससे पहले चार महिलाओं ने मंदिर में कूदकर प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन अयप्पा श्रद्धालुओं ने उन्हें रोक लिया। वहीं एक अन्य महिला भी पुलिस से इजाजत लेकर मंदिर में दर्शन के लिए निकली थी। जब वह पम्बा पहुंची तो जिस बस में वह सवार थी उसे ही प्रदर्शनकारियों ने चारों तरफ से घेर लिया। साथ ही उसे वहां से जाने पर मजबूर कर दिया गया।
इसके बाद वहां पुलिस पहुंची ने उसे भीड़ से बचाया। अब 4 नवंबर तक के लिए मंदिर बंद हो चुका है। बता दें बुधवार को मंदिर मासिक पूजा के लिए खुला था। जिसके बाद से अभी तक 13 महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की। इनकी उम्र 10 से 50 साल के बीच थी। अब त्रावणकोर देवासन बोर्ड ने मंगलवार को बैठक बुलाई है। जिसमें फाइनल रिपोर्ट पर फैसला होगा। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट भी मंदिर पर फैसले से जुड़ी समीक्षा याचिका पर आज फैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि वह केरल के सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किये जाने की तारीख पर मंगलवार को निर्णय करेगा। पीठ ने कहा था, 'हम जानते हैं कि 19 पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं। हम कल तक फैसला करेंगे।'