सबरीमाला मंदिर के द्वार सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोलने पर जारी विरोध बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को भारी विरोध प्रदर्शन के बीच मंदिर के कपाट खोले गए थे। 10-50 साल के बीच की किसी भी महिला को प्रदर्शनकारियों ने मंदिर के अंदर प्रवेश करने नहीं दिया। जहां एक तरफ भक्तों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है वहीं इसका राजनीति पर प्रभाव पड़ना निश्चित हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है।
भाजपा-आरएसएस मिलकर दक्षिण के
सबरीमाला मुद्दे को अयोध्या के राम मंदिर की तरह मसला बनाना चाहती है ताकि उसे चुनाव में फायदा मिल सके। वहीं सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वामपंथी संगठन डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस मिलकर भाजपा को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जिससे कि भाजपा को इससे किसी भी तरह के राजनीतिक फायदे को लेने से रोका जाए।
सभी उम्र की महिलाओं के लिए मंदिर के दरवाजे खुलने के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के कारण भाजपा ने अपनी स्थिति बदल ली है। स्थानीय इकाई ने पहले उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था। इसके वावजूद पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के कहने पर अब तेवर बदल लिए गए हैं। भाजपा जहां कह रही है कि वह विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व नहीं कर रही है। वहीं उसके नेताओं का कहना है कि संघ परिवार इन प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहा है ताकि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके इससे राजनीतिक फायदा लिया जा सके।
महाराष्ट्र से भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीधरन ने कहा, 'भाजपा केवल विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रही है। पार्टी उनका नेतृत्व या आयोजन नहीं कर रही है।' हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार किया कि पार्टी लोकसभा चुनाव में इससे फायदा लेना चाहती है।
भाजपा और आरएसएस को वर्तमान परिस्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए सीपीआई(एम) के सांसद एमबी राजेश ने कहा, 'यह एक वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई है और इसे हम आगे ले जा रहे थे। तभी आरएसए-भाजपा की ब्रिगेड ने विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। वहीं उनका समर्थन करके कांग्रेस ने अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ धोखा किया है।'
सीपीआई(एम) सांसद इस बात से सहमत नहीं हैं कि भाजपा इस विरोध को वोट में बदल सकती है। पूर्व नक्सल नेता, कार्यकर्ता और विश्लेषक सिविक चंद्रन का कहना है कि इस परिस्थिति के लिए राज्य सरकार खुद जिम्मेदार है। पिनराई विजयन सरकार इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करना चाहिए।