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सबरीमाला : 'सुप्रीम' आदेश के बाद 51 महिलाओं ने किया प्रवेश, सुरक्षा देने का निर्देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अजय सिंह Updated Fri, 18 Jan 2019 01:00 PM IST
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कनकदुर्गा (बाएं)- बिंदु (दाएं) - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाओं को 24 घंटे सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है। इन महिलाओं ने 2 जनवरी को मंदिर में प्रवेश किया था। 


 

वहीं केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को चौंकाने वाली जानकारी दी है। सरकार ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 51 महिलाओं ने प्रवेश किया है। अब इस खुलासे के बाद तनाव फिर बढ़ सकता है।


दूसरी ओर सबरीमाला मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल पर बैठी भाजपा नेता वीटी रमा को अस्पताल ले जाया गया है। वह बीते 10 दिनों से सचिवालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठी हैं। 


बता दें बिंदु और कनक दुर्गा नाम की दो महिलाओं ने 2 जनवरी को मंदिर में प्रवेश किया था। दोनों ने इस दिन सुबह 3:45 बजे मंदिर में जाकर दर्शन किया। करीब 40 की उम्र की ये महिलाएं मंदिर पर हो रहे प्रदर्शनों के बावजूद दर्शन करने में सफल रही हैं। एनडीवी को दिए इंटरव्यू में इन महिलाओं ने कहा था कि इस कदम से उनके जीवन को खतरा हो सकता था, लेकिन यह उनका संवैधानिक अधिकार है।  


कनक दर्गा के साथ सास ने मारपीट की थी


सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास बनाने महिला कनक दुर्गा अपने रिश्तेदारों के गुस्से का शिकार भी हुईं। मंदिर में प्रवेश के बाद जब कनक दुर्गा अपने घर वापस लौटी तो उनके इस कदम से नाराज सास ने उनपर हमला कर दिया। उन्हें मल्लपुरम जिले के पेरिन्थालमन्ना में अस्पताल में भर्ती कराया गया।


इसके बाद कनक दुर्गा ने पेरिन्थालमन्ना पुलिस से अपने सास के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए शिकायत की। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है।


इससे पहले कनक दुर्गा के पति ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था। परिवार ने कनक दुर्गा को अपनाने से इनकार कर दिया था।  मंदिर ने प्रवेश करने के बाद से ही बिंदु और कनक दुर्गा को धमकियां मिल रही थीं। प्रदेशभर में हिंसा का दौर शुरू हो गया था। 

 
जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की पाबंदी हटा दी थी। हालांकि, भगवान अयप्पा स्वामी के भक्तों के विरोध के कारण एक भी महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकी थी।

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