केरल के प्रसिद्ध हिंदू मंदिर सबरीमाला में सोना चोरी मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। सोना चोरी मामले की जांच कर रही टीम ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि मंदिर के द्वारपालक की मूर्तियों से लगभग दो किलो सोने का गबन किया गया।
आरोपी को 30 अक्टूबर तक हिरासत में भेजा
जांच अधिकारी एस शशिधरन ने शुक्रवार (17 अक्तूबर) को रन्नी स्थित न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अदालत में रिमांड रिपोर्ट दाखिल की, जहां पोट्टी को गिरफ्तार किया गया और रिमांड प्रक्रिया के तहत पेश किया गया। अदालत ने पोट्टी को 30 अक्टूबर तक विशेष जांच दल की हिरासत में भेज दिया है।
रिपोर्ट में आगे बताया कि स्मार्ट क्रिएशंस की मदद से सोने से मढ़ी तांबे की प्लेटों से सोना निकाला गया। इसे छिपाने के लिए केवल 394.9 ग्राम सोने की पुनः परत चढ़ाई गई। बाद में इन प्लेटों को सबरीमाला वापस करने से पहले, मंदिर की परंपरा के विरुद्ध विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। इसमें यह भी बताया कि द्वारपालक की मूर्ति की प्लेटों से सोने की हेराफेरी करने के बाद पोट्टी ने बाद में सोने की परत चढ़ाने के काम के लिए अन्य दानदाताओं की पहचान की, लेकिन दान किए गए सोने का कथित तौर पर पूरी तरह से इच्छित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया।
आरोपी को घर से हिरासत में ले लिया
रिमांड रिपोर्ट में आगे खुलासा हुआ कि 2019 में इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बाद द्वारपालक प्लेटों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के पूजा के लिए चेन्नई, बेंगलुरु और केरल के कई घरों और मंदिरों में ले जाया गया था। पोट्टी की गिरफ्तारी पर एसआईटी ने कहा कि उन्हें गुरुवार को सूचना मिली थी कि वह फरार हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "जब संपर्क किया गया, तो उसका फोन बंद मिला। चूंकि अदालत ने जांच पूरी करने के लिए एक समय सीमा तय की थी, इसलिए उससे पूछताछ जरूरी थी। इसलिए निर्देशानुसार अपराध शाखा के उप-अधीक्षक सुरेश बाबू ने गुरुवार दोपहर लगभग 12 बजे पोट्टी को उसके घर से हिरासत में ले लिया।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि पोट्टी समेत 10 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 403 (संपत्ति का बेईमानी से गबन), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 466 (सार्वजनिक दस्तावेज़ों की जालसाजी) और 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।