सबरीमाला सोना चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शुक्रवार को भगवान अयप्पा मंदिर के मुख्य पुजारी कंदरारू राजीव को गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी राजीव को गिरफ्तार करने के बाद एक अज्ञात जगह पर पूछताछ के लिए ले गई थी, बाद में उन्हें एसआईटी टीम ऑफिस लेकर आई, जहां उनकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर सूत्रों ने दावा किया है कि ईडी ने केरल के सबरीमाला सोना चोरी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है।
सोना चोरी में मिली भगत आई सामने
एसआईटी के अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी मामले के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पद्मकुमार के बयानों के आधार पर की गई है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि राजीवरु के पोट्टी के साथ करीबी संबंध थे और उन्होंने मंदिर में द्वारपालक (रक्षक देवता) की प्लेटों तथा श्रीकोविल (गर्भगृह) के द्वार-फ्रेम की री-प्लेटिंग की सिफारिश की थी।
इस मामले में अब तक 11 लोग गिरफ्तार
जब त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने री-प्लेटिंग के लिए उनसे अनुमति मांगी, तो राजीवरु ने इसे मंजूरी दे दी थी। एसआईटी अधिकारियों के अनुसार, राजीवरु से इस मामले में पहले भी पूछताछ की जा चुकी है। केरल हाईकोर्ट द्वारा इस सोना चोरी मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन के बाद यह 11वीं गिरफ्तारी है।
ये भी पढ़ें:
T20 World Cup: भारतीय टीम में चुने गए खिलाड़ियों का विजय हजारे में कैसा रहा प्रदर्शन? देखें पूरा रिपोर्ट कार्ड
ईडी ने दर्ज किया केस
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को केरल में सबरीमाला सोना चोरी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने पीएमएल की अलग-अलग धाराओं के तहत एक ईसीआईआर दर्ज की है। एसआईटी सोना चोरी की घटना से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है और अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। यह जांच भगवान अयप्पा मंदिर की अलग-अलग कलाकृतियों से सोने की हेराफेरी करने की आपराधिक साजिश, आधिकारिक कदाचार और प्रशासनिक चूक सहित कई अनियमितताओं से संबंधित है।
वीडियो देखें:
पुजारी के सहायक उन्नीकृष्णन पोट्टी ने की धोखाधड़ी
रिपोर्ट के अनुसार, 2004 से 2008 के बीच सबरीमाला मंदिर के पुजारी के सहायक के रूप में काम करने वाले उन्नीकृष्णन पोट्टी को 1998 में पता था कि द्वारपालक की मूर्तियों की तांबे की प्लेटें सोने से मढ़ी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पोट्टी ने इस जानकारी का इस्तेमाल धोखाधड़ी और आर्थिक लाभ कमाने के इरादे से किया, जिससे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को नुकसान हुआ।
आरोपी पोट्टी ने कथित तौर पर 2019 में द्वारपालक की मूर्तियों की "मरम्मत" के लिए एक आवेदन दायर किया था, जिनमें लगभग दो किलोग्राम सोना था। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लेटों को हटाने के बाद उन्हें कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और अंततः चेन्नई के अंबत्तूर स्थित स्मार्ट क्रिएशन्स सहित कई स्थानों पर ले जाया गया। रिपोर्ट में आगे बताया कि स्मार्ट क्रिएशंस की मदद से सोने से मढ़ी तांबे की प्लेटों से सोना निकाला गया। इसे छिपाने के लिए केवल 394.9 ग्राम सोने की पुनः परत चढ़ाई गई। बाद में इन प्लेटों को सबरीमाला वापस करने से पहले, मंदिर की परंपरा के विरुद्ध विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। इसमें यह भी बताया कि द्वारपालक की मूर्ति की प्लेटों से सोने की हेराफेरी करने के बाद पोट्टी ने बाद में सोने की परत चढ़ाने के काम के लिए अन्य दानदाताओं की पहचान की, लेकिन दान किए गए सोने का कथित तौर पर पूरी तरह से इच्छित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया।