पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजते हुए कहा था कि धार्मिक स्थानों पर महिलाओं व लड़कियों को प्रवेश से वर्जित करने जैसी धार्मिक परंपराओं की सांविधानिक वैधता के बारे में बहस का मुद्दा सिर्फ सबरीमाला मामले तक सीमित नहीं है। पीठ ने नौ सदस्यीय पीठ के विचार के लिए सात कानूनी मुद्दे तैयार किए थे।
इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता का परस्पर प्रभाव, सांविधानिक नैतिकता के भाव को अलग करना और किसी धार्मिक प्रथा के बारे में जांच पड़ताल करने की न्यायालय की सीमा, अनुच्छेद 25 के अंतर्गत हिंदुओं के वर्गों तात्पर्य और एक वर्ग या समुदाय की आवश्यक धार्मिक प्रथाओं को अनुच्छेद 26 के तहत संरक्षण प्राप्त होने संबंधी सवाल थे।