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श्रीलंका के इनकार पर पाक ने स्थगित किया सार्क सम्मेलन, कहा- जल्द घोषित करेंगे नई तिथि

Sat, 01 Oct 2016 12:03 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली सार्क समिट को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। पाकिस्तान ने सम्मेलन के रद्द होने के लिए भारत को जिम्मेदार बताया है। पाकिस्तान के विदेश विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) सम्मेलन के लिए नई तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
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रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सम्मेलन में भाग नहीं लेने और सार्क की प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए भारत की आलोचना भी की है। पाकिस्तान के विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में ये भी कहा गया है कि सार्क सम्मेलन को बाधित करना भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता के विपरीत है जिसमें उन्होंने क्षेत्र में गरीबी से लड़ने का आह्वान किया था। 

इससे पूर्व सार्क समिट के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक और झटका तब लगा जब श्रीलंका ने भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि भारत द्वारा सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार करने के बाद इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने से इनकार करने वाला श्रीलंका पांचवां देश बन गया। इससे पहले, भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने सार्क समिट में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।
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इन देशों ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि वह ऐसा माहौल पैदा कर रहा है, जिसमें सार्क सम्मेलन संभव नहीं है। सार्क का गठन 1985 में हुआ था और मौजूदा समय में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका इसके सदस्य हैं। 
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लोगों के हितों के लिए शांति और सुरक्षा जरूरी

श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि क्षेत्र के मौजूदा हालात को देखते हुए इस्‍लामाबाद में 19वां सार्क शिखर सम्मेलन आयोजन किसी भी तरह से उचित नहीं है।

बयान में कहा गया है कि सार्क घोषणा पत्र के प्रावधानों के अनुसार सम्मेलन में कोई भी निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाना चाहिए और ऐसा तभी हो सकता है जब सभी सदस्य देश इस में हिस्सा लें।

बयान में भारत और पाकिस्तान के बीच व्याप्त तनाव का तो उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई है। इसमें क्षेत्र में फैले आतंकवाद से निर्णायक तरीके से निपटने पर जोर दिया गया है। कहा गया है कि दक्षिण एशिया के लोगों के हितों और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने के लिए शांति और सुरक्षा निहायत ही जरूरी हैं। 
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