आईएफएस दिवस 2022 पर रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश सेवा में काम कर रहे लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) आने वाले वर्षों में और ताकत से बढ़ेगी और विश्व स्तर पर भारत के हितों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
उन्होंने कई लगातार ट्वीट कर कहा कि सेवा का जन-केंद्रित दृष्टिकोण देश और विदेश में व्यापक रूप से प्रकट होता है। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि जिस शानदार तरीके से विदेश सेवा के सदस्यों ने ऑपरेशन गंगा की चुनौतियों का सामना किया उसे पूरे देश ने देखा।
आगे उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आईएफएस और विकसित होगा, साथ ही एक नए और आत्मविश्वास से भरे भारत को प्रतिबिंबित करेगा। साथ ही यह 2047 के लिए हमारे राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा।
विदेश मंत्री ने वेलिंगटन में नए भारतीय उच्चायोग चांसरी का किया उद्घाटन
जयशंकर ने रविवार को कहा कि एक दूसरे की क्षमताओं का समन्वय करना भारत और न्यूजीलैंड के बीच अहम संबंधों को और प्रगाढ़ करने का अधिक विवेकपूर्ण तरीका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने की आवश्यकता है। कई चुनौतियां, कई संभावनाएं हैं जो भारत और न्यूजीलैंड जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। साथ ही उन्होंने न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों को आ रही समस्याओं का मुद्दा भी कीवी नेतृत्व के समक्ष उठाई। विदेश मंत्री ने रविवार को वेलिंगटन में नए भारतीय उच्चायोग चांसरी का उद्घाटन किया।
डिजिटल, कृषि, शिक्षा आदि क्षेत्रों में कारोबार की असीम संभावनाएं
उन्होंने कहा कि हमारे संबंधों को प्रगाढ़ करने का अधिक विवेकपूर्ण तरीका वास्तव में एक-दूसरे की क्षमताओं का समन्वय है। हमें अधिक कारोबार करने के रास्ते तलाशने चाहिए, क्योंकि आखिरकार कारोबार किसी भी रिश्ते के लिए अच्छा है। एक बार यदि किसी कारोबारी संबंध के लिए मजबूत नींव पड़ जाती है तो वह रिश्ता वाकई मजबूत और स्थिर रहता है। उन्होंने कहा कि व्यापार, डिजिटल, कृषि, शिक्षा, कौशल, पारंपरिक औषधि तथा समुद्री सुरक्षा क्षेत्रों में कारोबार की असीम संभावनाएं हैं। मजबूत सहयोग से हमारे साझा क्षेत्र में शांति, समृद्धि और प्रगति सुनिश्चित होगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीधे हवाई संपर्क पर भी बात की।
भारतीय छात्रों की समस्याओं के प्रति सहानुभूति रवैया अपनाने की अपील
जयशंकर ने कहा कि भारतीय छात्रों को कोविड-19 के दौरान यहां मुश्किल वक्त का सामना करना पड़ा। हममें से किसी के लिए भी कोविड-19 के दौरान समय आसान नहीं था लेकिन छात्रों ने शायद हम में से अन्य तुलना में ज्यादा सहन किया। इसलिए, उन्होंने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से यहां रह रहे भारतीय छात्रों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। दोनों ही नेताओं ने इस मसले को सहानुभूतिपूर्ण ढंग से लेने का आश्वासन दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि उम्मीद है कि इस मसले पर कुछ प्रगति होगी। न्यूजीलैंड में करीब 250000 भारतीय मूल और एनआरआई हैं।