- यह 400 किलोमीटर के दायरे में एक साथ परमाणु मिसाइल, क्रूज मिसाइल, ड्रोन, लड़ाकू विमान और बैलिस्टिक मिसाइलों को पलक झपकते ही नष्ट कर सकता है।
- प्रणाली में लगा रडार 600 किलोमीटर दूर से ही अपने लक्ष्य को देख सकता है।
- हर तरह की मिसाइल, लड़ाकू विमान को मार गिराने की सबसे अचूक क्षमता
- चीन और पाकिस्तान की परमाणु सक्षम बैलेस्टिक मिसाइलों के लिए कवच की तरह काम करेगी।
- आधुनिकतम जेट लड़ाकू विमान को भी मार गिराने में सक्षम है।
- पाकिस्तान की सीमा में उड़ रहे विमानों को भी ट्रैक कर सकेगा।
अमेरिका कर चुका है विरोध
2017 में रूस के साथ हुए पांच अरब डॉलर के एस-400 मिसाइल सिस्टम के सौदे का अमेरिका विरोध कर चुका है। तुर्की ने भी रूस से एस-400 सौदा किया लेकिन अमेरिका ने उस पर पाबंदी लगा दी। हालांकि, भारत के मामले में अमेरिका पर वहां के सांसदों का दबाव है कि भारत को इस प्रतिबंध से दूर रखा जाना चाहिए, इसलिए अमेरिका ने इस पर नरम रुख अपनाया है।
लखनऊ में अगले माह होगी रक्षा प्रदर्शनी
अगले माह लखनऊ में रक्षा प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। रोमन बाबुशकिन ने बताया कि रूस के वाणिज्य मंत्री की अगुआई में 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस प्रदर्शनी में हिस्सा लेगा। उन्होंने कहा, रक्षा प्रदर्शनी में हिस्सेदारी करने वाला रूस सबसे बड़ा देश होगा। उम्मीद करते हैं कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कई नए समझौते होंगे।
वहीं, भारत में रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा, अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश दूसरे देशों के अस्तित्व को नकारना चाहते हैं। इनका संशोधनवादी एजेंडा है। अमेरिका दुनिया में ऐसा वैकल्पिक नजरिया बढ़ाना चाहता है जो प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ विभाजनकारी भी है। सवाल उठता है कि हम क्यों उनके नजरिये को अपनाएं जब दुनिया में पहले ही ऐसी कई रणनीतियां हैं जो विचारशील और समावेशी हैं। रूसी राजदूत ने कहा कि पश्चिमी देशों के विचार चिंता पैदा करने वाले हैं। अमेरिका चीन को मिटाना चाहता है।
रूस कभी कश्मीर मुद्दे को यूएन लाने के पक्ष में नहीं रहा
पाकिस्तान की चीन के जरिए कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की लगातार कोशिशों के संदर्भ में कुदाशेव ने कहा कि रूस कभी इस मुद्दे को यूएन में लाने के पक्ष में नहीं रहा है। यह द्विपक्षीय मुद्दा है। कश्मीर पर चर्चा के मामले में यूएन में भी आम सहमति नहीं है।