रूस-यूक्रेन युद्ध से लोगों की मानसिक अवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। जिससे लोगों में चिंता, घबराहट और असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है, तो लंबे समय में लोगों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। कुछ लोगों को यह डर सताने लगता है कि वे पागल हो जाएंगे। कुछ लोगों में असुरक्षा इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें लगने लगता है कि समाज ने उन्हें अकेला छोड़ दिया है और अब उनके पास सुरक्षित रहने का कोई तरीका नहीं बचा है। यह असर सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक विकारों के रूप में दिखाई पड़ सकता है। युद्धजन्य मानसिक परेशानियां सैनिकों के साथ-साथ आम नागरिकों पर भी समान रूप से दिखाई पड़ती हैं।
इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मृगेश वैष्णव ने अमर उजाला से कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस तरह की परिस्थितियां देखी गई थीं। युद्ध बीत जाने के बाद भी लोगों को लंबे समय तक इसके मानसिक दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ा था। ऐसी स्थितियों में नागरिकों पर दो तरह का असर दिखाई पड़ता है। कम अवधि में लोगों को चिंता, घबराहट, अवसाद, डर, भय़ जैसे विकार दिखाई पड़ सकते हैं। लोगों में असुरक्षा की भावना गंभीर हो जाती है जिससे वे कोई भी कार्य शांतचित्त तरीके से नहीं कर पाते। वहीं, लंबी अवधि में लोगों को कानों में तेज आवाज सुनाई पड़ना, नींद न आना, पूरा समय चिंता में गुजारना दिखाई पड़ता है।
सार्क फेडरेशन में मनोचिकित्सकीय मामलों के सलाहकार डॉ. मृगेश वैष्णव ने कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में लोगों में असुरक्षा की भावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। लोग स्वयं को अपने घर में भी असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। ये मामले कितने गंभीर हो सकते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद युद्धग्रस्त देशों ने अपने नागरिकों के इलाज के लिए जगह-जगह पर मनोचिकित्सा केंद्र खोले थे, लेकिन इसके बाद भी इन मामलों का पूरी तरह से उपचार नहीं किया जा सका। इसका महिलाओं-बच्चों पर बेहद गंभीर नकारात्मक असर दिखाई पड़ता है। बच्चे लंबे समय तक, और कई बार पूरे जीवन भर, स्वयं को डरा हुआ महसूस करते रहते हैं।
एम्स के सीनियर रेजीडेंट डॉ. श्रीनिवास एसआर ने कहा कि असुरक्षा की भावना बढ़ने के कारण लोग इन स्थितियों में एक मजबूत सरकार चुनने के लिए वोट करते हैं। उन्हें लगता है कि इन परिस्थितियों में एक मजबूत सरकार होने से उनके ऊपर हमले नहीं हो सकेंगे और ऐसी सरकार उन्हें शारीरिक और आर्थिक सुरक्षा दे सकेगी। हालांकि, कई बार इस तरह का फैसला सही साबित नहीं हुआ है। एक युद्ध से निकलने के बाद लोगों ने मजबूत राष्ट्रवाद से प्रेरित होकर हिटलर जैसे व्यक्ति को अपना नेता चुन लिया था। लेकिन बाद का अनुभव बताता है कि हिटलर दूसरे देशों से ज्यादा स्वयं अपने ही देश के नागरिकों के लिए नुकसानदेह साबित हुआ।
इस तरह की परिस्थिति में मानसिक विकारों से बचने के लिए लोगों को समूह में रहने की कोशिश करनी चाहिए। परिवार के सदस्यों के एक साथ रहने से असुरक्षा की भावना कम होती है। परिवार और आसपास एक-दूसरे को सकारात्मक विचारों से प्रेरित करें और सकारात्मक परिणामों की उम्मीद करें। डराने वाले और उत्तेजना पैदा करने वाले समाचारों से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। योग करना, भजन या शांतिपूर्ण गीत सुनना और सादा भोजन चिंता-अवसाद को कम करने में मदद करता है। किसी परेशानी की स्थिति में तुरंत अपने मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।