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Russia Ukraine War Update: पुतिन के ये खास टैंक मात्र एक 'खुराक' में यूक्रेन को पहुंचा रहे हैं भारी नुकसान, रिमोट से होते हैं कंट्रोल!

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 03 Mar 2022 06:01 PM IST

सार

रूसी सेना के टैंक के पीछे एक बड़ा ईंधन टैंक लगा होता है। इसमें करीब पांच सौ लीटर अतिरिक्त डीजल भरा रहता है, जबकि टैंक में 1200 लीटर डीजल की फिलिंग होती है। यही वजह है कि लड़ाई के आठवें दिन तक वही टैंक दौड़ रहे हैं। अभी उन्हें री-फिलिंग की जरूरत नहीं पड़ी है...
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रूस-यूक्रेन युद्ध- T14 आर्मटा मुख्य युद्धक टैंक - फोटो : Agency




टी-14 आर्माटा मुख्य युद्धक टैंक

तमिलनाडु के अवाडी में स्थित हैवी व्हीकल फैक्ट्री 'भारतीय आयुध निर्माणी' जहां पर टी-90 जैसे टैंकों का निर्माण किया जाता है, वहां के एक एक्सपर्ट बताते हैं कि रूस के पास इस वक्त दुनिया के बेहतरीन टैंक मौजूद हैं। टी-90 को बनाने के लिए भी रूस की मदद लेनी पड़ती है। यूक्रेन में टी-14 आर्माटा, मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) माना जाता है। इसका अपडेट वर्जन भी तैयार हुआ है। रूसी सेना के टैंक को यूक्रेन में जो टॉस्क मिला है, वह एक बार की फिलिंग में पूरा हो सकता है। लड़ाई के दौरान सेना अतिरिक्त फ्यूल का कुछ इंतजाम रखती है।



एक्सपर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के कई बड़े शहर रूस की सीमा से 40-45 किलोमीटर दूर हैं। खारकीव तो रूस बॉर्डर से सिर्फ 25 मील यानी 40 किलोमीटर की दूरी पर है। वहां तक पहुंचने के पक्के रास्ते हैं। अगर टैंक को उबड़-खाबड़ या पहाड़ी क्षेत्र से नहीं गुजरना है, तो वह कम ईंधन खर्च करता है। सड़क पर वह टैंक पांच-छह लीटर डीजल में एक किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। पहाड़ी इलाके में छह से आठ लीटर ईंधन में एक किलोमीटर चलता है। भारत के टी-90 टैंक की भी लगभग यही खासियत है।

पांच सौ लीटर अतिरिक्त डीजल

रूसी सेना के टैंक के पीछे एक बड़ा ईंधन टैंक लगा होता है। इसमें करीब पांच सौ लीटर अतिरिक्त डीजल भरा रहता है, जबकि टैंक में 1200 लीटर डीजल की फिलिंग होती है। यही वजह है कि लड़ाई के आठवें दिन तक वही टैंक दौड़ रहे हैं। अभी उन्हें री-फिलिंग की जरूरत नहीं पड़ी है। करीब 55 टन वजनी यह टैंक 80 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से दौड़ता है। टैंक पर 125 एमएम की स्मूथबोर कैनन लगी होती है। इसके जरिए दर्जनभर राउंड प्रति मिनट गोले दागे जा सकते हैं। टैंक में एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम भी लगा है। इसकी मदद से हेलीकॉप्टर को मार गिराया जा सकता है। टैंक के पास तीन किलोमीटर दूरी तक का सटीक निशाना लगाने की अचूक मारक क्षमता है।



रूसी सेना के पास लगभग 15 हजार टैंक बताए जाते हैं। इन्हीं की मदद से पुतिन के सैनिक यूक्रेन के भीतरी हिस्सों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ ले. जन. संजय कुलकर्णी ने एक मीडिया चैनल के साथ बातचीत में कहा, अब रूस की सेना के पास दो विकल्प हैं, एक तो वह स्ट्रीट फाइटिंग करे और दूसरा, सामरिक टारगेट की तर्ज पर रिहायशी इलाकों में बमबारी कर दे। अंदरूनी इलाकों में पहुंचने का एकमात्र जरिया टैंक होता है। फ्यूल स्टेशन पर रूस द्वारा बमबारी की जा रही है। ये स्ट्रेटजिक टारगेट होते हैं, इन पर बमबारी की जाती है। एक्सपर्ट के अनुसार, इस तरह की लड़ाई में टैंक बेहद कारगर साबित होते हैं। इन्हें कहीं भी घुसाया जा सकता है। टी-14 आर्मटा टैंक का अपग्रेड वर्जन रिमोट कंट्रोल से संचालित होता है। इसका फायदा यह होता है कि लड़ाई के दौरान हवाई या मिसाइल अटैक से टैंक के भीतर बैठे सैनिक सुरक्षित रहते हैं। वे किसी सुरक्षित ठिकाने से टैंक का परिचालन कर सकते हैं।

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