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भारत के साथ टकराव के बीच रूस संग सैन्य अभ्यास कर रहा पाकिस्तान

Sat, 24 Sep 2016 07:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : NDTV
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रूस ने शनिवार को उन खबरों को खारिज कर दिया कि पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास आंशिक रूप से पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में होगा। भारत ने इस इलाके में दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास पर गहरी चिंता जाहिर की थी। 
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दिल्ली स्थित रूसी उच्चायोग ने एक बयान जारी कहा कि सैन्य अभ्यास केवल चेरात होगा। इसके अलावा रत्तू के मिलिट्री स्कूल में सैन्य अभ्यास से जुड़ी खबरें भ्रामक और शरारतपूर्ण हैं। 

रूस की सरकारी मीडिया TASS ने शुरुआती में खबर दी थी कि सैन्य अभ्यास का उद्घाटन समारोह पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान में रत्तू स्थित आर्मी स्कूल में होगा। हालांकि बाद में TASS की वेबसाइट से इस खबर को हटा लिया गया। 
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हालांकि दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास से जुड़ी बहुत ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। कहा जा रहा है कि सैन्य अभ्यास पहाड़ी इलाकों में आयोजित किया जाएगा। इस बीच ऐसी खबरें भी आ रही है कि भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देने के बाद मास्को ने पीओके में सैन्य अभ्यास की योजना को बदल दिया। 
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अमेरिकी सांसदों ने रोक दी एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री

- फोटो : PTI
'फ्रेंडशिप 2016' नाम के इस सैन्य अभ्यास में रूस और पाकिस्तान के दो सौ सैनिक हिस्सा लेंगे। दोनों देशों का यह सैन्य अभ्यास दो हफ्ते तक चलेगा। 24 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाले इस सैन्य अभ्यास को शीतयुद्ध के दो शत्रु देशों के बीच बढ़ते सैनिक सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। 

अमेरिका के साथ खराब होते संबंधों के बीच पकिस्तान मास्को के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में लगा है। गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री को अमेरिकी सांसदों ने रोक दिया था।  

पिछले पंद्रह महीनों से पाकिस्तानी आर्मी के जनरल्स रूस का लगातार दौरा कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर की बैठकों का परिणाम यह रहा कि मास्को ने इस्लामाबाद को चार एमआई-35 हमलावर हेलिकॉप्टर बेचने की डील पर हस्ताक्षर किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान रूस से Su-35 फाइटर जेट भी खरीदने की कोशिश में लगा हुआ है। 

इन सबके बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेश नीति के मसले पर भारत और अमेरिका की बढ़ती दोस्ती के मद्देनजर रूस ने यह कदम उठाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खबर उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारतीय कोशिशों के लिए झटका है।
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