राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया पर बृहस्पतिवार को तमिलनाडु की विधानसभा में तीखी बहस के साथ हंगामा हुआ। विपक्षी दल डीएमके ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में मुस्लिमों के त्योहारों को शामिल नहीं किया गया है। वहीं जवाब देते हुए सत्ताधारी एआईडीएमके ने कहा कि 2010 की नियमावली में भी ये नहीं थे। 2010 की एनपीआर नियमावली में जो भी पर्व शामिल थे वे 2020 की नियमावली में भी हैं। विपक्ष वोटबैंक की राजनीति के लिए इसका विरोध कर रहा है।
नेता प्रतिक्ष एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी से राज्य में एनपीआर की कवायद नहीं होने की घोषणा करने की अपील की। स्टालिन ने कहा कि जनगणना के नए फार्म कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि नए एनपीआर फार्म में माता-पिता के जन्म का स्थान और जन्म की तारीख जैसी जानकारी मांगी गई है। अगर कोई उचित प्रमाणपत्र नहीं हैं तो लोगों से त्योहार का समय बताने को कहा गया है। इस सूची में मुस्लिम त्योहारों का जिक्र नहीं है। यह अपने आप में धार्मिक बंटवारे को उजागर करता है।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने के लिए पूछे जाने वाले सभी सवाल एनपीआर में है और ये दोनों कवायद अलग-अलग नहीं है। ये आपस में जुड़ी हुई है। किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि इससे केवल मुसलमान प्रभावित होंगे। तमिल लोगों से समेत सब पर इसका परिणाम जरूर दिखेगा। उन्होंने मांग की राज्य में एनपीआर की कवायद न की जाए। उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेलवम ने कहा कि हम सभी त्योहार रमजान, बकरीद, पोंगल और दीपावली मनाते हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।