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Ruchira Kamboj:पूर्व राजदूत कंबोज बोलीं- वैश्विक विमर्श में भारत की अहम भूमिका, हाशिए पर रहे लोगों की आवाज बना

Sat, 26 Oct 2024 05:13 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत की पूर्व स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने रंगभेद और उपनिवेशवाद से मुक्ति पर भारत के रुख का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा दबे-कुचले लोगों, हाशिये पर पड़े लोगों और बेजुबानों की आवाज रहा है। 
 
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रुचिरा कंबोज - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की पूर्व स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में 'वैश्विक एजेंडा को आकार देना: भारत का बहुपक्षीय जनादेश' विषय पर दूसरे चाणक्य रक्षा संवाद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इतिहास में वैश्विक मामलों पर भारत की सिद्धांतवादी स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली की 'सॉफ्ट पावर' आज वैश्विक विचार-विमर्श को आकार देने में एक महत्वपूर्ण शक्ति बन गई है।

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भारतीय सेना द्वारा सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलएडब्ल्यूएस) के सहयोग से 'राष्ट्र निर्माण में चालक: व्यापक सुरक्षा के माध्यम से विकास को बढ़ावा' विषय पर चाणक्य रक्षा संवाद का आयोजन किया गया था।

रंगभेद और उपनिवेशवाद से मुक्ति पर भारत के रुख का उल्लेख किया
इस दौरान पूर्व भारतीय राजदूत कंबोज ने रंगभेद और उपनिवेशवाद से मुक्ति पर भारत के रुख का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा दबे-कुचले लोगों, हाशिये पर पड़े लोगों और बेजुबानों की आवाज रहा है। उन्होंने कहा, "भारत 1945 में संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य था। भारत हमेशा दबे-कुचले लोगों, हाशिये वाले लोगों और बेजुबान लोगों के लिए आवाज रहा है। हमने रंगभेद के खिलाफ सिद्धांतवादी रुख अपनाया, जब यह व्यापक रूप से स्वीकृत नहीं था, और हमने उपनिवेशीकरण आंदोलन में भी अग्रणी भूमिका निभाई।'
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रंगभेद को यूएन के एजेंडे में लाने वाला पहला देश भारत
पूर्व भारतीय राजदूत कंबोज ने कहा कि भारत रंगभेद को संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में लाने वाला पहला देश था। हम 1992 में इस व्यवस्था के खत्म होने तक इस पर कायम रहे। उन्होंने आगे कहा, 'दक्षिण अफ्रीका संघ में भारत के साथ व्यवहार का एजेंडा वह एजेंडा आइटम था जिसे हम संयुक्त राष्ट्र में लाए थे, जिसने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरोधी संघर्ष में भारत की बड़ी भागीदारी के लिए मंच तैयार किया।'

हमेशा नैतिक नेतृत्व के बारे में रहा भारत का दृष्टिकोण
कंबोज ने बहुपक्षवाद के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण कभी भी 'सत्ता की राजनीति' के बारे में नहीं, बल्कि नैतिक नेतृत्व के बारे में रहा है। यह आज तक अपरिवर्तित है। हमारे संस्थापक नेता इसे मानते हैं।

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