सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से अब पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़ा हो गया है। घोष ने बीते साल विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल हलफनामे में झाड़ग्राम पॉलीटेकनिक कालेज से डिप्लोमा हासिल करने का दावा किया था। उन्होंने इस बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया था। लेकिन अब सूचना के अधिकार के तहत मिली एक जानकारी से उनका यह दावा झूठा नजर आ रहा है।
भाजपा से निकाले गए एक नेता अशोक सरकार ने बीती जनवरी में उक्त कानून के तहत घोष की शैक्षणिक योग्यता के बारे में जानकारी मांगी थी। अब ईश्वर चंद्र विद्यासागर पॉलीटेकनिक से मिले जवाब में कहा गया है कि घोष ने वर्ष 1975 से 1990 के बीच इस कालेज से ऐसी कोई परीक्षा नहीं पास की है। झाड़ग्राम में दूसरा कोई पॉलीटेकनिक नहीं है।
घोष का जन्म वर्ष 1964 में हुआ था। अब 1975 में डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए उनकी उम्र बहुत कम थी और 1990 में बहुत ज्यादा। वे 1990 में 26 साल के थे जबकि डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र 21 साल है। अब सरकार ने इस आधार पर घोष से इस्तीफा देने की मांग की है। घोष पूर्व मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सीट से विधायक हैं। सरकार ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1975 से 1990 की समयसीमा नहीं चुनी थी। संस्थान ने घोष की उम्र को ध्यान में रखते हुए खुद यह समयसीमा तय की होगी।
दूसरी ओर, दिलीप घोष ने इस जानकारी पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहें तो अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। उधर, सरकार ने कहा है कि वे कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। पहले वे इस बारे में चुनाव आयोग को लिखेंगे और फिर विधानसभा अध्यक्ष को।
अगर इन दोनों में से किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो वे अदालत की शरण में जाएंगे। सरकार ने भी बीते साल भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन बाद में घोष से उनकी दूरी बढ़ गई। यह मामला सामने आने के बाद माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी घोष के इस्तीफे की मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि पार्टी विधानसभा में यह मुद्दा उठाएगी। विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्ना ने कहा है कि वे पूरे मामले के बारीकी से अध्ययन और पुष्टि के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे।