पिछले कुछ वर्षों में खराब मौसम के कारण एक ओर जहां चावल और गेहूं की पैदावार प्रभावित हुई थी तो वहीं दूसरी ओर बाढ़, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदा में हजारों मीट्रिक टन अनाज बर्बाद हो गया। अमर उजाला को आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पिछले चार वित्तीय वर्षों में 20 हजार 776 मीट्रिक टन अनाज (गेहूं और चावल) बर्बाद हुए।
भारतीय खाद्य निगम मुख्यालय में चार अगस्त 2016 को लगाई आरटीआई में प्राकृतिक आपदा में भंडारण में रखे हुए गेहूं व चावल के आंकड़े मांगे थे। निगम की एसपीआईओ सारिका प्रीतम ने 16 अगस्त को आरटीआई के जरिए चार वित्तीय वर्ष की जानकारी उपलब्ध कराई। सरकारी आंकड़े के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2012-13 में 955 मीट्रिक टन, 2013-14 में 2135 मीट्रिक टन, 2014-15 में 15,526 मीट्रिक टन और 2015-16 में 2,157 मीट्रिक टन गेहूं व चावल प्राकृतिक आपदा में बर्बाद हुए। साल 2015-16 में बाढ़ से गेहूं व चावल खराब नहीं हुआ ऐसी जानकारी दी गई है।
भारतीय खाद्य निगम ने 2012-13 और 2013-14 में खराब हुए चावल और गेहूं का अलग-अलग ब्यौरा नहीं दिया है। आरटीआई के मुताबिक 2016 (1 जुलाई) तक 0.8 मीट्रिक टन ही चावल खराब हुआ जबकि गेहूं का नुकसान नहीं हुआ। चूहों के कारण पिछले चार वर्षों में भंडारण में रखे हुए गेहूं और चावल को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
गेहूं से ज्यादा चावल का नुकसान
आरटीआई के जरिए पता चलता है कि गेहूं से ज्यादा चावल प्राकृतिक आपदा में बर्बाद हुआ। वित्तीय वर्ष 2014-15 में बारिश से 124 मीट्रिक टन, बाढ़ से 5192 मीट्रिक टन और चक्रवाती तूफान से 5414 मीट्रिक टन चावल बर्बाद हुआ। जबकि वित्तीय वर्ष 2015-16 में बारिश से 79 और चक्रवाती तूफान से 1355 मीट्रिक टन चावल खराब हो गया है। इस हिसाब से इन दो वित्तीय वर्षों में 12 हजार 165 मीट्रिक टन चावल बर्बाद हो गया। वहीं दूसरी ओर 2014-15 में गेहूं 4795 मीट्रिक टन और 2015-16 में 724 मीट्रिक टन गेहूं बर्बाद हुआ। यानी दो वर्षों में 5519 मीट्रिक टन गेहूं सड़ गया।