गर्भवती महिलाओं के लिए अभियान।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी एक शाखा- संवर्धिनी न्यास ने गर्भ संस्कार नाम का एक नया अभियान शुरू किया है। इसके जरिए न्यास गर्भवती महिलाओं को अपने बच्चों को संस्कारी बनाने की शिक्षा देगा।
न्यास की राष्ट्रीय संगठन सचिव माधुरी मराठे के मुताबिक, स्त्री रोग विशेषज्ञों, आयुर्वेदिक चिकित्सकों और योग प्रशिक्षकों के साथ मिलकर न्यास एक कार्यक्रम की योजना बना रहा है, जिसमें गर्भ में शिशुओं को सांस्कृतिक मूल्य सिखाने के लिए गर्भावस्था के दौरान गीता, रामायण का पाठ और योगाभ्यास कराया जाएगा।
मराठे ने कहा कि यह कार्यक्रम गर्भ में मौजूद शिशु से दो साल की उम्र तक के बच्चों के लिए चलाया जाएगा और इसके तहत गीता के श्लोकों और रामायण की चौपाइयों के जाप पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘गर्भ में बच्चा 500 तक शब्द सीख सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस अभियान का उद्देश्य एक ऐसा कार्यक्रम विकसित करना है, जिससे सुनिश्चित हो कि बच्चा गर्भ में संस्कार सीख सके और यह प्रक्रिया बच्चे के दो साल पूरे हो जाने तक जारी रहेगी।’’
संघ की महिला शाखा संवर्धिनी न्यास की इस मुहिम को कम से कम 1,000 महिलाओं तक पहुंचाने की योजना है। मराठे ने बताया कि इस अभियान के तहत न्यास ने रविवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की, जिसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-दिल्ली सहित कई अस्पतालों के स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।