संघ को लगता है कि नीति आयोग के कामकाज की दिशा सरकार की सोच के बिल्कुल उल्ट है। जिस मकसद ने पीएम नरेंद्र मोदी ने योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग का गठन किया था वह अपने मकसद में कामयाब नहीं रह पाया है।
भगवा चिंतक नीति आयोग के अब तक के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। नीति आयोग का कामकाज भी उन्हें योजना आयोग की राह पर बढ़ता दिख रहा है। नीति आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की कवायद में संघ जल्द ही आयोग की नाकामियों को पीएम मोदी के समक्ष रखेगा, जिससे कि नीति आयोग के कार्यप्रणाली में बदलाव हो सके।
नीति आयोग के दो वर्ष के कामकाज की समीक्षा के लिए संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने एक खुली परिचर्चा का आयोजन रखा था, जिसमें देशभर से आए भगवा चिंतकों और विचारकों ने आयोग की अब तक के कार्यप्रणाली पर असंतोष दिखाते हुए चिंता जताई।
स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि नीति आयोग को जो अधिकार दिए गए हैं वह उस हिसाब से कार्य नहीं कर रहा है। आयोग ने अब तक विभिन्न मुद्दों पर 23 रिपोर्ट दिए हैं। इनमें से कुछ रिपोर्ट को देखकर कर लगता है कि आयोग ने जमीनी स्तर से राय लेकर रिपोर्ट नहीं बनाई है।