आरएसएस ने यूपी फतह के लिए सेवा भारती और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) समेत 50 से अधिक संगठनों को मैदान में उतार दिया है। संघ के इस मिशन में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत तमाम हिंदूवादी संगठन भी शामिल हैं। संघ ने इन संगठनों को भाजपा के लिए सियासी जमीन तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।
सभी संगठनों ने विधानसभावार अपने प्रभारी बनाए हैं। संघ की योजना का ही कमाल है कि एक विधानसभा में भाजपा के पास जनता की नब्ज टटोलने और विरोधी दलों की सियासी चाल समझने के लिए 50 से अधिक प्रभारी हैं। इन प्रभारियों को भाजपा उम्मीदवार को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इतना ही नहीं अब तक जो संगठन सियासत से दूर थे या पर्दे के पीछे थे, इस बार खुलकर भाजपा के समर्थन में आ गए हैं।
ये कार्यकर्ता गांव-गांव, घर-घर जाएंगे। लोगों को राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाएंगे और उनसे भाजपा के पक्ष में वोट करने की अपील करेंगे। हालांकि एबीवीपी के 50 हजार से अधिक कार्यकर्ता एक महीने से यूपी के गांवों की खाक छान रहे हैं। उनसे मिले फीडबैक से संघ को यूपी में कमल खिलने की उम्मीद जगी है। एबीवीपी ने बताया है कि सूबे में अब भी मोदी मैजिक बरकरार है। जनता मोदी के कामकाज से खुश है और विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका फायदा मिलेगा।