राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय समन्वय बैठक इस वर्ष राजस्थान के जोधपुर में होगी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के दिल्ली में होने वाले तीन दिवसीय विशेष संबोधन के बाद यह पहली बड़ी बैठक होगी जिसमें संघ के सभी शीर्ष पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। पांच से सात सितंबर के बीच होने वाली इस तीन दिवसीय बैठक में हाल में हुई महत्त्वपूर्ण घटनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
विपक्ष ने चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाकर इस समय देश के सामने एक नई परिस्थिति पैदा की है। विपक्ष ने इसके सहारे हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव 2024 पर भी सवाल उठाए हैं। माना जा रहा है कि इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए संघ अपनी बैठक में इस मुद्दे पर भी विचार कर सकता है।
इसके अलावा उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड समाप्त कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने का प्रावधान विधानसभा द्वारा पारित कर दिया गया है। यह कई दूसरे राज्यों को भी इस मुद्दे पर एक नई राह दिखा सकता है। संघ इस मुद्दे पर भी विचार विमर्श कर सकता है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अलावा दत्तात्रेय होसबोले और संघ के अन्य शीर्ष पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।
32 अनुषांगिक संगठनों के अध्यक्ष लेंगे हिस्सा
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया है कि इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्र सेविका समिति, भारतीय किसान संघ, विद्या भारती सहित संघ के 32 सहयोगी संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, संगठन मंत्री और अन्य महत्त्वपूर्ण पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।
उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर हर साल होने वाली इस बैठक में पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा की जाती है। इसके अलावा अगले वर्ष के कार्यक्रमों के लिए रणनीति और आपसी समन्वय स्थापित करने पर विचार किया जाता है। लेकिन हाल-फिहाल में हुई प्रमुख घटनाओं पर भी विचार-विमर्श किया जाता है। पिछले वर्ष अखिल भारतीय समन्वय बैठक केरल के पलक्कड़ में आयोजित की गई थी।
संघ के शताब्दी कार्यक्रमों पर भी होगा विचार
चूंकि 2025 में दशहरे के साथ ही संघ का शताब्दी वर्ष भी शुरू हो जाएगा, इस बैठक में आनुषंगिक संगठनों के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों और उनके आपसी तालमेल पर भी बातचीत होगी। इसका उद्देश्य संघ के उद्देश्यों को समाज के निचले स्तर तक ले जाना होगा। सभी अनुषांगिक संगठन अपने-अपने स्तर पर संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम बनाएंगे। लेकिन उनमें आपसी सहयोग स्थापित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।