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मोहन भागवत ने संघ ध्वज जैसे कई विवादों पर खुलकर दिया जवाब

Tue, 18 Sep 2018 03:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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mohan bhagwat
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ के विचारों और इतिहास पर खुलकर बात की और संघ को कठघरे में खड़ा करने वाले विपक्षियों के सवालों का जवाब दिया। भागवत मंगलवार को विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण, व्याख्यानमाला के दूसरे दिन बोल रहे थे।
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स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका 

संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और उनके संघर्ष के बारे में बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ को समझने के लिए डॉ. हेडगेवार से शुरुआत करनी चाहिए। भागवत ने हेडगेवार के हवाले से संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा को बयां करने की कोशिश की। 

संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन परिचय बताते हुए उन्होंने कई घटनाओं का जिक्र किया जब उन्होंने गांधी के आंदोलन के समर्थन में बैठके आयोजित कीं या भाषण दिए। एक बैठक की अध्यक्षता तो खुद मोतीलाल नेहरू ने की थी। उनमें देशभक्ति कूट कूट कर भरी थी। वे सशस्त्र क्रांति के समर्थक थे। राजगुरु को फरारी के दौरान उन्होंने मदद की थी। लेकिन बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस में विदर्भ प्रांत के शीर्षस्थ कार्यकर्ता बने। 1931 के लाहौर अधिवेशन में जब कांग्रेस ने संपूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया तो संघ ने पूरे देश में संचालन कर इसका समर्थन किया। 
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rahul gandhi-mohan bhagwat
संघ महिला विरोधी नहीं 

भागवत ने बीते दिनों कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान कि आरएसएस महिला विरोधी संगठन है, महिलाओं को इसमें प्रवेश नहीं करने दिया जाता, का भागवत ने अप्रत्यक्ष तौर पर जवाब दिया।

उन्होंने कहा बहुत से लोगों को मालूम नहीं है कि आरएसएस की एक महिला इकाई, जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेविका कहा जाता है, इसमें महिलाओं की ही भागेदारी होती है। इसे स्वतंत्रता से पहले स्थापित किया गया था। भागवत ने कहा, 'हमारी मां और बहन, जहां भी वे हैं, आरएसएस द्वारा किए गए कार्यों में योगदान देती रहती हैं।' 

Mohan Bhagwat
संघ का अलग ध्वज 

संघ पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने को लेकर बहुत सारे विवाद सामने आ चुके हैं। कुछ समय पहले राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया था कि आजादी के 52 साल बाद भी संघ मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज की बजाय भगवा ध्वज को सलामी दी जाती है।

भागवत ने अपने पहले दिन के व्याख्यान में भगवा ध्वज पर संघ की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वयंसेवक संघ हर साल भगवा ध्वज को गुरु दक्षिणा देते हैं। संगठन इस प्रकार दान दक्षिणा से चलता है। भागवत ने कहा कि संघ ने हमेशा राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किया है। 

Mohan Bhagwat at Nagpur RSS Event - फोटो : PTI
संघ में लोकतंत्र है

वर्तमान समय में संघ की मान्यताओं पर उन्होंने कहा कि संघ के मूल में अनुशासन, सेवा और लोकतंत्र हैं। हमारे यहाँ हर स्वयंसेवक को अपने मन का काम करने की स्वतंत्रता होती है। उन्होंने एक छोटे बच्चे का उदाहरण दिया जिसने खुद उनसे शाखा में सवाल जवाब किए। यह दिखाता है कि संघ में कितना लोकतंत्र है। 

भागवत ने कहा कि जब उन्हें सदस्य के तौर पर नामांकित किया गया था, उस समय एक युवा द्वारा शाखा के कार्यक्रम में भाग नहीं लेने पर उनसे सवाल किया था। भागवत ने कहा, 'मुझे उस युवक को समझाना पड़ा कि मैं यात्रा कर रहा था और इसलिए कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सका।'

मोहन भागवत
संघ सहयोगियों का रिमोट कंट्रोल नहीं 

भागवत ने आरएसएस और उसके सहयोगियों के कार्यकलापों और आरएसएस बीजेपी और सरकार को कैसे नियंत्रित करता है, इस सवाल के जवाब में कहा कि उनके सहयोगी स्वतंत्र हैं। भागवत ने कहा  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में न तो निरंकुशता है और न ही अहंकार।

यह किसी को भी समन्वय बैठकों या रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाता। ऐसे मुद्दों पर वह सार्वजनिक बैठके करके जनता के सामने चर्चा और बहस करने के पक्ष में तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में कौन होगा, देश किस नीति को स्वीकार करेगा यह लोगों और समाज को तय करना है। 
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मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला
संघ का उद्देश्य 

भागवत ने हेडगेवार का हवाला देते हुए कहा कि संगठन का लक्ष्य सभी हिंदुओं को एकजुट करना है। यह केवल समाज में बदलाव लाने के द्वारा किया जा सकता है। उन्होंने हिंदुओं को परिभाषित करते हुए कहा, 'बलिदान, धैर्य, निगम और कृतज्ञता हिंदुओं के मूलभूत मूल्य हैं।' उन्होंने कहा कि भारत की विविधता के बावजूद इन मूल्यों के द्वारा इन्हें परिभाषित किया जा सकता है। 
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