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इस्लामिक सेंटर में संघ संगठनों ने कराया रामलीला का मंचन, सभी कलाकार मुस्लिम

Sat, 15 Oct 2016 03:30 AM IST
एम संजय / अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक चित्र
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विजयदशमी पर रावण दहन के बाद भी भगवा परिवार की ओर से रामलीला के जरिए सियासत साधने का खेल जारी है। दशहरा पर्व पर नवाबों की नगरी लखनऊ से पीएम मोदी के संदेश के बाद संघ ने इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रामलीला का मंचन कर देश के मुस्लिमों को भारतीय संस्कृति में ढ़लने का संकेत दिया है। हालांकि रामलीला के इस मंचन में मुस्लिम समुदाय की उपस्थिति नाम मात्र की रही। मगर इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रामलीला मंचन के आयोजन को ही भगवा रणनीतिकार बड़ी सफलता मान रहे हैं। 
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यूपी में सीने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दकी को हिंदू संगठनों के विरोध के कारण रामलीला में किरदार का मौका बेशक नहीं मिला। मगर यहां दिल्ली में रामलीला मंचन करवाकर भगवा परिवार ने मुस्लिम समाज को उदारता बरतने की नसीहत दी है। संघ हमेशा से यह बात कहता रहा है कि भारत में रह रहे मुस्लिम पहले हिंदू थे। कई जगह मुस्लिम परिवार हिंदू रीति रिवाज को पूरी तरह अपनाते हैं। देश के मुस्लिमों को भी उदारता बरतनी चाहिए। 

शुक्रवार को संघ परिवार से जुडे़ सामाजिक संस्थाओं ने इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रामलीला का मंचन रखा था। खास बात यह रही की मंचन करने वाले सभी कलाकार मुस्लिम थे। जोकि इस खास मकसद के लिए इंडोनेशिया से बुलाए गए हैं। कार्यक्रम के थीम वर्तमान पीढ़ी को रामायण की प्रासंगिकता बताने से ही संघ के प्रयास की पुष्टि होती है। रामलीला मंचन की शुरूआत करते हुए संघ के राष्ट्रीय नेता इंद्रेश कुमार ने भी अपने इरादे जता दिए। अपने संबोधन में इंद्रेश कुमार ने कहा कि हमें राम को आदर्श मानना चाहिए। उन्होंने दुश्मनों के आंख में भी अपने लिए जगह बनाई। वे धर्म के साथ थे, इसलिए उनकी पूजा होती है। कुमार ने कहा कि रावण ने अपने राज में सभी लोगों को सोने के मकान दे रखे थे। जबकि राम ने अपने नागरिकों को मिट्टी के मकान दिए थे। बावजूद उसके जनता में राम की पूजा होती है रावण की नहीं। 
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रावण दहन के बाद भी रामलीला की सियासत है जारी

- फोटो : ब्यूरो
भारत के खिलाफ षडयंत्र रचने वालों को नसीहत देते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की जन्म तिथि तो सबकों मालूम है। मगर भारत देश के जन्म के बारे में किसी को नहीं मालुम, यह पुरातन काल से आजीवन चलता आ रहा है और भविष्य में भी बना रहेगा। तलाक के नाम पर हो हल्ला मचा रहे मुस्लिम संगठनों को नसीहत देते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि पाक में मुस्लिम महिलाओं की गवाही को आधी मानी जाती है जबकि भारत में किसी भी महिला की गवाही को पूरा  माना जाता है। आखिर मुस्लिम देशों में महिलाओं से भेदभाव क्यों है। उन्होंने मुस्लिम समाज से गलत परंपराओं को त्यागने की अपील की।
 
रामलीला के लिए इंडोनेशिया से मुस्लिम कलाकारों को चुनने में भी संघ के प्रयास का खास मकसद है। विश्व के सबसे ज्यादा मुस्लिम इंडोनेशिया में ही रहते हैं। लेकिन वहां आज भी भारत के संस्कृति का समान आदर है। इंडोनेशिया के कई मुस्लिम अपने आप को हिंदू संस्कृति से जुड़ा मानते हुए आज भी वहां रामलीला का सार्वजनिक मंचन करते हैं। 

इस्लामिक सेंटर में इंडोनेशिया से आए मुस्लिम कलाकारों के जरिए रामलीला का मंचन कराकर संघ ने भारत के मुस्लिमों के सामने नजीर पेश करने की कोशिश की है। जब दुनिया का सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश भारतीय संस्कृति की कद्र कर सकता है। तो भारत के मुस्लिम हिंदू धर्म और उसके पहचान का सम्मान क्यों नहीं करते। कार्यक्रम के आयोजन में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के पुत्र शौर्य डोभाल की भी प्रमुख भूमिका रही। 
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