विजयदशमी पर रावण दहन के बाद भी भगवा परिवार की ओर से रामलीला के जरिए सियासत साधने का खेल जारी है। दशहरा पर्व पर नवाबों की नगरी लखनऊ से पीएम मोदी के संदेश के बाद संघ ने इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रामलीला का मंचन कर देश के मुस्लिमों को भारतीय संस्कृति में ढ़लने का संकेत दिया है। हालांकि रामलीला के इस मंचन में मुस्लिम समुदाय की उपस्थिति नाम मात्र की रही। मगर इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रामलीला मंचन के आयोजन को ही भगवा रणनीतिकार बड़ी सफलता मान रहे हैं।
यूपी में सीने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दकी को हिंदू संगठनों के विरोध के कारण रामलीला में किरदार का मौका बेशक नहीं मिला। मगर यहां दिल्ली में रामलीला मंचन करवाकर भगवा परिवार ने मुस्लिम समाज को उदारता बरतने की नसीहत दी है। संघ हमेशा से यह बात कहता रहा है कि भारत में रह रहे मुस्लिम पहले हिंदू थे। कई जगह मुस्लिम परिवार हिंदू रीति रिवाज को पूरी तरह अपनाते हैं। देश के मुस्लिमों को भी उदारता बरतनी चाहिए।
शुक्रवार को संघ परिवार से जुडे़ सामाजिक संस्थाओं ने इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रामलीला का मंचन रखा था। खास बात यह रही की मंचन करने वाले सभी कलाकार मुस्लिम थे। जोकि इस खास मकसद के लिए इंडोनेशिया से बुलाए गए हैं। कार्यक्रम के थीम वर्तमान पीढ़ी को रामायण की प्रासंगिकता बताने से ही संघ के प्रयास की पुष्टि होती है। रामलीला मंचन की शुरूआत करते हुए संघ के राष्ट्रीय नेता इंद्रेश कुमार ने भी अपने इरादे जता दिए। अपने संबोधन में इंद्रेश कुमार ने कहा कि हमें राम को आदर्श मानना चाहिए। उन्होंने दुश्मनों के आंख में भी अपने लिए जगह बनाई। वे धर्म के साथ थे, इसलिए उनकी पूजा होती है। कुमार ने कहा कि रावण ने अपने राज में सभी लोगों को सोने के मकान दे रखे थे। जबकि राम ने अपने नागरिकों को मिट्टी के मकान दिए थे। बावजूद उसके जनता में राम की पूजा होती है रावण की नहीं।