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चीन को दबाव में लाने के लिए भारत ने बिछाया कूटनीतिक जाल 

Sat, 15 Oct 2016 03:19 AM IST
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली
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शनिवार से गोवा में शुरू हो रहे ब्रिक्स समिट में सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने और चीन को दबाव में लाने के लिए भारत ने कूटनीतिक जाल बिछा दिया है। भारत जहां चीन के इतर ब्रिक्स के सदस्य देशों को आतंकवाद के सवाल पर अपने पक्ष में एकजुट करने की कोशिशों में जुटा है, वहीं उसकी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए विशेष तौर पर आमंत्रित किए गए बिम्सटेक के सदस्य देशों से पाकिस्तान की लानत मलामत करने की है। 
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इस रणनीति के तहत बिम्सटेक के सदस्य 6 देशों के राष्ट्राध्यक्ष पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाएंगे। भारत इस मुद्दे पर चीन पर दबाव बनाने के लिए ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील को भी सीमा पार आतंकवाद की निंदा कराने की कोशिशों में जुटा है। भारत के रुख को भांपते हुए ही चीन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि ब्रिक्स के मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

दरअसल पीएम मोदी इस समिट के दौरान 11 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। ब्रिक्स समिट में भी भारत सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाएगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान पीएम मोदी सीमा पार आतंकवाद और आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने पर चीन के प्रतिकूल रुख का मुद्दा उठाएंगे।
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आतंकवाद के सवाल पर पाकिस्तान को घेरने की तैयारी

भारत की पहली कोशिश ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के जरिए आतंकवाद के सवाल पर पाकिस्तान को घेरने की होगी। इसके बाद भारत ने बिम्सटेक के सदस्य देशों बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यामार और थाइलैंड के जरिए सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश देगा। इसके लिए भारत ने इन सभी देशों को राजी भी कर लिया है। सार्क देश पहले ही इस मुद्दे पर पाकिस्तान को खरी खरी सुना चुके हैं। 

नेपाल के बाद बांग्लादेश को साधने में जुटा चीन
पाकिस्तान के खिलाफ भारत की ओर से किए गए सर्जिकल अटैक पर चुप्पी साधने पर मजबूर हुआ चीन ब्रिक्स समिट में इसकी कसर निकालना चाहता है। यही कारण है कि समिट से पहले ही उसने आतंकी मसूद अजहर पर भारत के रुख का साथ न देने और एनएसजी की सदस्यता पर पुराने रुख पर कायम रहने की सार्वजनिक घोषणा की है। इसके इतर चीन की निगाहें भारत के पड़ोसी देशों पर भी है। नेपाल, श्रीलंका में इस आशय की कोशिश के बाद अब चीन बांग्लादेश को साधना चाहता है। इसी रणनीति के तहत चीन ने बांग्लादेश को बड़ा कर्ज देने की रणनीति बनाई है।
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