राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि ‘शुद्ध प्रेम’ पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। भले ही वह अलग-अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच हो, लेकिन हिंदू लड़कियों को अगवा करने की कोई भी सुनियोजित साजिश निश्चित रूप से समस्याग्रस्त है।
उन शादियों का संघ ने स्वागत किया-होसबाले
प्रेम किसी समाज में वर्जित नहीं
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह केवल हिंदू लड़कियों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं और अगर किसी अन्य समुदाय की लड़की का अपहरण भी होता है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।उन्होंने कहा, 'आप यह नहीं कह सकते कि 'चूंकि हम एक ही डीएनए से संबंधित हैं, इसलिए यह ठीक है'। यह ठीक नहीं है। इसीलिए यह सामाजिक रूप से स्वीकार्य होना चाहिए। प्रेम किसी समाज में वर्जित नहीं है।
लव जिहाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
जब उनसे विशेष रूप से पूछा गया कि क्या उनका मतलब यह है कि संघ अलग-अलग धर्मों या समुदायों के व्यक्तियों के बीच प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं है, तो उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों के कई परिवार ऐसे हैं जहां लोगों ने अपनी जाति, समुदाय या धर्म से बाहर शादी की है। उन्होंने कहा, हम इसका प्रचार नहीं करते क्योंकि हम इसे एक स्वाभाविक बात मानते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जिसे 'लव जिहाद' कहा जा रहा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं और हर महीने अदालतों में इनकी सुनवाई हो रही है।
क्या प्यार सिर्फ एकतरफा होता है?
उन्होंने कहा, 'कई लड़कियां वापस आई हैं और उन्होंने अपनी दुख भरी कहानियां सुनाई हैं... लगभग 20,000 मामले दर्ज किए गए हैं। ये सब चीजें यूं ही नहीं हो सकतीं।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्यार सिर्फ एकतरफा होता है?' क्या सभी मामले हिंदू लड़कियों और मुस्लिम लड़कों के ही हैं? तो इसका मतलब है कि इस प्यार का सिर्फ एक ही पहलू है। फिर यह प्यार नहीं है। इसमें कोई साजिश है।'
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हिंदुओं के लिए अधिक बच्चे पैदा करने की आवश्यकता के बारे में भगवत की टिप्पणियों से संबंधित एक अन्य प्रश्न पर, होसाबले ने कहा कि यह परिवार की सुरक्षा और कई अन्य कारणों से महत्वपूर्ण है। यदि केवल एक ही बच्चा हो, एक ही बच्चे का नियम हो, तो यदि किसी उम्र में बच्चे को कुछ हो जाता है, तो बुढ़ापे में माता-पिता का क्या होगा? दूसरा, अगर केवल एक ही बच्चा है जिसे सारा प्यार और सब कुछ मिलता है, तो इस बात का खतरा रहता है कि बच्चे में अहंकार या अकेलापन विकसित हो जाए।' उन्होंने कहा, 'भाई-बहन हमें प्यार, साझा करना और करुणा सिखाते हैं। लेकिन अगर कोई बच्चा बिना भाई-बहन के बड़ा होता है, तो उसे मनोवैज्ञानिक समस्याएं, अहंकार या अकेलापन हो सकता है।'
उन्होंने आगे कहा कि समुदाय और राष्ट्र के लिए अधिक बच्चे होना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने जापान का जिक्र करते हुए कहा, 'हम अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं, हम धन का सृजन कर रहे हैं, हम हर चीज में वृद्धि कर रहे हैं। लेकिन भविष्य में, अगर देश बूढ़े लोगों का देश बन जाता है, तो समस्या होगी।' होसाबाले ने कहा कि भारत एक प्राचीन राष्ट्र है, लेकिन हजारों वर्षों के बाद भी यह एक युवा राष्ट्र है। उन्होंने लोगों से अधिक बच्चे पैदा करने की वकालत करते हुए कहा, 'हमें एक राष्ट्र के रूप में युवा बने रहना चाहिए।'