राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पाकिस्तान को छोड़ कर दुनिया भर से 60 देशों को तीन दिनों के व्याख्यान श्रृंखला में आमंत्रित किया है। आरएसएस अगले हफ्ते दिल्ली में तीन दिवसीय लेक्चर सीरीज का आयोजन करने जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत इस लेक्चर सीरीज को संबोधित करेंगे और दर्शकों के सवाल का जवाब भी देंगे। विश्व के 60 देशों को आमंत्रण भेजने की काम शुरू कर दिया गया है लेकिन पड़ोसी मुल्क को लिस्ट से बाहर रखा गया है।
इस लेक्चर सीरीज में देश के सभी राजनैतिक पार्टियों को भी आमंत्रण भेजा गया है । साथ ही वो क्षेत्रिय पार्टियां जिनका अपने क्षेत्र में ज्यादा प्रभाव है और वो लगातार आरएसएस की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहते हैं खासतौर पर इस सम्मेलन में बुलायें गये हैं। अपने कूटनीतिक मिशन में राजनैतिक पार्टियों के अलावा उद्योग जगत और मीडिया के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने पर भी आयोजनकर्ता विचार कर रहे हैं।
साठ देशों के दूतावासों में और एशिया में पाकिस्तान को छोड़ कर सभी दूतावासों को आमंत्रण पत्र भेजा गया है। आरएसएस के उच्च पदाधिकारी के मुताबिक आतंक का समर्थन करने वाले देश को पाकिस्तान को इस सीरीज में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं। आरएसएस भारतीय सैनिकों पर सीमा पर हमले करने वाले देश और भारत के साथ रिश्तों पर नकारात्मक रवैया रखने वाले देश को इस कार्यक्रम में बुलाना जरूरी नहीं समझता। जबकि चीन को आमंत्रण भेजा गया है क्योंकि भारत और चीन में सांस्कृतिक समानतायें हैं।
पाकिस्तान पर आरएसएस के आधिकारिक बयान के लिए प्रचारक प्रमुख राजीव तुली से पूछा गया तो उन्होने टिप्पणी करने से मना कर दिया। 17 सितंबर से शुरू होने वाले लेक्चर सीरीज में प्रमुख मोहन बागवत अलग-अलग देश से आये लोगों के साथ संवाद करेंगे और सवालों का जवाब भी देंगे। इस पूरी सीरीज का शीर्षक 'फ्युचर भारत' यानि
भारत का भविष्य-आरएसएस परप्रेक्ष्य रखा गया है जिसमे देश के जाने माने लोग दर्शक मंडली की शोभा बढ़ंगायेंगे।
आपको याद दिला दें कि 27 अगस्त को आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरूण कुमार ने लेक्चर सीरीज की घोषणा की थी। दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव और भविष्य में भारत की भूमिका पर आरएसएस दुनिया के विचार जानने के साथ अपने विचार भी पहुंचाना चाहता है। खास बात ये है कि यह आरएसएस का पहला प्रोग्राम होगा, जिसमें वह सीधे तौर पर लोगों से बात करके अलग-अलग मुद्दे पर अपनी राय रखेगा।
पहले दिन मोहन भागवत आरएसएस, इसके संगठन, विचारधारा, विजन, एक्टिविटिज और प्रोग्राम के बारे में बात करेंगे। अगले दिन वह आरक्षण, हिंदुत्व और कम्युनिज्म सहित कई राष्ट्रीय हित के सामयिक मुद्दे पर अपने विचार रखेंगे।