अमेरिका की ओर से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी रामलाल ने चुनौती के बजाय अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत आत्मविश्वास के साथ खड़ा होता है तो यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने का अवसर साबित हो सकती है।
रामलाल ने रविवार को भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत ग्लोबल इंडस्ट्री फोरम’ के सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें उद्योग जगत के नेताओं, नीति निर्माताओं और विदेशी निवेशकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को बढ़ावा देकर और सही औद्योगिक नीतियां बनाकर भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
1998 के परमाणु परीक्षण का उदाहरण
उन्होंने याद दिलाया कि जब 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था, तब भी कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि भारत घास की रोटी खाकर भी लड़ेगा, लेकिन पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने उस वक्त भी मजबूती दिखाई और धीरे-धीरे सभी प्रतिबंध हटा लिए गए। आज भी वही आत्मविश्वास जरूरी है।
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चुनौतियों को अवसर मानने की अपील
आरएसएस के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख ने कहा कि आज का शुल्क युद्ध कब तक चलेगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसे अवसर मानकर आगे बढ़ते हैं या खतरे से डर जाते हैं। अगर सरकार, उद्योग संगठन और आम लोग एक दिशा में सोचें तो हर चुनौती अवसर में बदली जा सकती है।
रामायण का उदाहरण
रामलाल ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हनुमान जी को उनकी शक्ति याद दिलाने पर उन्होंने समुद्र पार किया था, वैसे ही भारत को अपनी ताकत पहचाननी होगी। उन्होंने कहा कि भारत की प्रकृति डरने की नहीं है, बल्कि अवसरों को संकल्प में बदलने की है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगर चौथी औद्योगिक क्रांति कहीं होगी तो उसका नेतृत्व भारत करेगा, क्योंकि दुनिया मानती है कि भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
स्वदेशी और बेहतर नीतियों पर जोर
उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि सरकार को उद्योग-हितैषी नीतियां बनानी चाहिए। उद्योग संगठनों से उन्होंने अपेक्षा जताई कि वे भी सक्रिय भूमिका निभाएं ताकि देश का उद्योग बढ़े, निर्यात बढ़े और आयात कम हो।
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कानून-व्यवस्था सुधारने की जरूरत
रामलाल ने निवेश आकर्षित करने के लिए कानून-व्यवस्था में सुधार की भी बात कही। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र औद्योगीकरण से अभी भी दूर हैं। कई राज्यों में निवेशकों की बैठकें होती हैं, समझौते भी होते हैं, लेकिन उद्योग वहां नहीं जाते क्योंकि कानून-व्यवस्था मजबूत नहीं है।
कश्मीर को लेकर कही ये बात
उन्होंने कहा कि जैसे कश्मीर घाटी में पहले उद्योग नहीं जाते थे क्योंकि माहौल ठीक नहीं था। लेकिन अब स्थिति बेहतर हुई है तो उद्योग वहां जाने पर विचार करने लगे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब देश अच्छा चलेगा, तभी उद्योग भी अच्छे से चल पाएंगे।रामलाल का संदेश साफ था कि भारत को आत्मविश्वास और स्वदेशी नीति के साथ चुनौतियों को अवसर में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि भारत अवसरों को पहचानकर संकल्प में बदलता है और यही ताकत उसे वैश्विक नेतृत्व तक ले जाएगी।