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आरएसएस नेता ने राष्ट्रवाद को बताया एक पश्चिमी अवधारणा, बोले-भारत में हमेशा आध्यात्मिक लोकतंत्र 

Sat, 15 Feb 2020 09:27 PM IST
अमित कुमार पीटीआई, नागपुर

सार

आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने शनिवार को राष्ट्र और राष्ट्रवाद को दो अलग-अलग शब्द बताया है, जिनकी परिभाषा में भी अंतर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह (संयुक्त महासचिव) डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने ‘द्वितीय नागपुर साहित्य महोत्सव’ में यह बातें कहीं। 
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डा. मनमोहन वैद्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से सामंजस्य बिठाने वाला और बहुध्रुवीय देश रहा है। भारत में हमेशा ही आध्यात्मिक लोकतंत्र रहा है। यह हमेशा से सामंजस्य बिठाने वाला देश रहा है। धर्म का पालन करना हमेशा ही भारत का स्वभाव रहा है।

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मनमोहन वैद्य ने कहा, 'धर्म का मतलब समाज को अपना मानकर उसे देना है। इसका मतलब साझा करना और समाज को देना है। धर्म का मतलब समाज को समृद्ध करना है।' उन्होंने कहा, 'धर्म का मतलब पंथ नहीं होता है। इसका मतलब समाज को देना और साझा करना है। इसी तरह से राष्ट्र का मतलब लोग होते हैं और राष्ट्रीयता का मतलब राष्ट्रवाद नहीं है। राष्ट्रवाद एक पश्चिमी अवधारणा है।'

आरएसएस नेता ने कहा कि धर्म भेदभाव नहीं करता है। यह समाज को जोड़ता है और उसे एकजुट करता है। धर्म हर व्यक्ति को जोड़ता है और एकजुट करता है। उन्होंने कहा, 'भारत 800 साल के इस्लामी और ब्रिटिश शासन के बावजूद भी इस्लामी या ईसाई देश क्यों नहीं हो गया? इसका एक कारण यह है कि भारत हमेशा ही बहुध्रुवीय देश रहा है, जहां नियंत्रण समाज के पास रहा है। उसने अपने फैसलों को क्रियान्वित किया है, जबकि शासकों ने सहयोगी भूमिका निभाई।' 
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कट्टर शब्द पर भी बात 
डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने कट्टर शब्द पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 'कट्टर' शब्द अंग्रेजी भाषा के फंडामेंटलिज्म शब्द से आया है। हमारे यहां कई लोग कहते हैं कि वह कट्टर हिंदू हैं। वैद्य ने कहा कि हिंदू आक्रामक हो सकता है, लेकिन कट्टर नहीं हो सकता। 

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