राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सम्मेलन में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शामिल होने के फैसले ने सियासी रंग ले लिया है। मुखर्जी के संघ का न्योता स्वीकारने पर राजनीतिक नफा-नुकसान तौल रही कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस की इस असहजता के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नितिन गडकरी ने कहा कि राजनीति में अछूत मानने की धारणा अब पुरानी पड़ चुकी है।
उन्होंने प्रणब के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक अच्छी पहल है। संघ एक राष्ट्रवादी संगठन है, न कि पाकिस्तान की आईएसआई, जहां प्रणब नहीं जा सकते। गडकरी ने इस सवाल पर यहां तक कह दिया कि लोग शराब खरीदने जाते हैं, महलिाएं बार में जाती हैं। तो एक पूर्व राष्ट्रपति के आरएसएस सम्मेलन में जाने को मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस के नेता दबी जुबान से कह रहे हें कि यह फैसला प्रणब मुखर्जी का है कांग्रेस का नहीं। हालांकि इन चर्चाओं के बीच सबको यह इंतजार है कि 7 जून को प्रणब मुखर्जी संघ सम्मेलन के भाषण में क्या कहते हैं।