दिल्ली के एक होटल में संघ और ईसाई समाज के मिलन की नई इबारत लिखी गई। पहली बार देखा गया कि ईसाई समाज और संघ परिवार, जिनमें 36 का आंकड़ा माना जाता रहा है, वह एक मंच पर आए। कार्यक्रम से एक बात और खुलकर सामने आई कि आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार एक बार फिर सरकार के लिए संकट मोचक बन कर उभरे। यह विश्व स्तर पर मोदी सरकार की छवि बनाने की नई कोशिश है, क्योंकि केंद्र सरकार को लेकर विदेशों में सवाल उठे थे।
इंटरनेशनल क्रिसमस सेलिब्रेशन में आरएसएस और दुनिया भर के 90 आर्कबिशप और बिशप के एक मंच पर आने के कई सियासी और दूरगामी अनुमान लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में चार घंटे तक रंगारंग कार्यक्रम और भाषणों के माध्यम से विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
आरएसएस का ईसाई समाज को साफ संदेश
वेटिकन में प्रधानमंत्री मोदी और सर्वोच्च ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस की मुलाकात को सार्थक करने की पहल के रूप में भी यह कार्यक्रम था। साथ ही मंच से आरएसएस का ईसाई समाज को सीधा और साफ संदेश था कि पत्थर फेंकोगे तो पत्थर मिलेगा, यानी धर्मांतरण जैसे मुद्दों को संघ बर्दाश्त नहीं करेगा।
गोवा चुनाव से जुड़ा था यह सेलिब्रेशन
इस कार्यक्रम के जरिए यह दिखाने की कोशिश भी रही कि संघ एक समागम है। साथ चलने, फलने फूलने का भरोसा दिया गया। बहुत जल्द गोवा में चुनावी सरगर्मियां शुरू होने वाली हैं और इस सिलसिले में इस सेलिब्रेशन को गोवा चुनाव की रणनीति पर काम की शुरुवात भी माना जा रहा है जहां ईसाई वोट से सरकार बनती है।
2024 के लोकसभा चुनाव पर भी नजर
इस कार्यक्रम का एक बड़ा उद्देश यह भी रहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेसी वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके। गोवा के अलावा नॉर्थ ईस्ट, कर्नाटक जैसी जगहों में ईसाई वोट बड़ी तादाद में हैं। 2019 का आम चुनाव जीतने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 2024 चुनाव में 5 करोड़ अल्पसंख्यक वोट पाने का लक्ष्य रखा है। इसे संघ नेता इंद्रेश कुमार बखूबी पूरा करते नजर आ रहे हैं। इसी लक्ष्य के तहत संघ नेता मुस्लिम, ईसाई, पारसी समुदाय को जोड़ने में लगे हैं। सवाल यह है कि अब आगे क्या? मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, भारतीय क्रिश्चियन मंच के बाद इंद्रेश कुमार क्या अब भारतीय सिख मंच भी बनाने जा रहे हैं?
ईसाई समुदाय धर्मांतरण व कट्टरता छोड़े, एक मंच पर आए : इंद्रेश कुमार
कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने ईसाई समुदाय से आह्वान किया है कि वह भेदभाव, धार्मिक कट्टरता और धर्मांतरण को छोड़ कर देश के विकास के लिए आगे आए। संघ नेता ने कहा कि किसी भी धर्म को किसी दूसरे धर्म पर आक्रमण नहीं करना चाहिए बल्कि एक साथ एक मंच पर आकर समस्या का समाधान खोजना चाहिए। संघ नेता ने विश्वास जताया कि भारत ही दुनिया को शांति का रास्ता दिखाएगा। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु था और एक बार फिर से विश्व गुरु बनेगा। कार्यक्रम में अनेक देशों के आर्कबिशप, बिशप, दूत और प्रतिनिधि शामिल हुए।
अमेरिकी आर्कबिशप गोस्सलिन ने की पीएम की तारीफ
अमेरिकी आर्कबिश्प रॉबर्ट गोस्सलिन भी कार्यक्रम में शरीक हुए। उन्होंने भी अपने भाषण में भारत, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के कामों की तारीफ की। उन्होंने भारतीय चिकित्सकों, इंजीनियरों, आईटी प्रोफेशनल्स के काम की तारीफ की, जो अमेरिका की तरक्की और कामयाबी में बखूबी अपना किरदार निभा रहे हैं।